ईरान के हमलों से अमेरिका को भारी नुक़सान, पहले दो हफ़्तों में गवां दिए 75 अरब रुपये से ज़्यादा

अल सदर और अल रुवायस (यूएई) के रडार ठिकानों पर नुक़सान

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    • Author, डैनियल बुश
    • पदनाम, वॉशिंगटन संवाददाता
    • Author, पॉल ब्राउन और एलेक्स मरे
    • पदनाम, बीबीसी वेरिफ़ाई
  • पढ़ने का समय: 5 मिनट

मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान के हमलों से जंग के पहले दो हफ़्तों में क़रीब 800 मिलियन डॉलर (करीब 75 अरब 20 करोड़) का नुक़सान हुआ. एक नए विश्लेषण में यह सामने आया है.

सेंटर फ़ॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ (सीएसआईएस) की रिपोर्ट और बीबीसी के विश्लेषण के अनुसार, इस नुक़सान का बड़ा हिस्सा पहले हफ़्ते में ईरान की ओर से किए गए जवाबी हमलों में हुआ जब अमेरिका और इसराइल ने जंग छेड़ी थी.

क्षेत्र में अमेरिकी संसाधनों पर ईरानी हमलों से हुए कुल नुक़सान की पूरी तस्वीर अभी साफ़ नहीं है.

लेकिन अमेरिकी सैन्य ढांचे को हुए अनुमानित 80 करोड़ डॉलर का नुक़सान दिखाता है कि जैसे-जैसे संघर्ष लंबा खिंच रहा है, अमेरिका को भारी क़ीमत चुकानी पड़ रही है.

इस अध्ययन के सह-लेखक और सीएसआईएस से जुड़े वरिष्ठ सलाहकार मार्क कैंसियन ने कहा, "क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को हुआ नुक़सान कम आंका गया है. हालांकि यह काफ़ी व्यापक दिखता है, लेकिन पूरी जानकारी मिलने तक कुल नुक़सान का सही आंकड़ा पता नहीं चल पाएगा."

टिप्पणी के अनुरोध के जवाब में अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस युद्ध का नेतृत्व कर रहे यूएस सेंट्रल कमांड के पास बीबीसी को भेजा. वहां के अधिकारियों ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

कहां-कहां नुक़सान

जंग शुरू होने से पहले बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे की सैटेलाइट तस्वीर

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ईरान के जवाबी हमलों में जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात और मध्य पूर्व के अन्य देशों में अमेरिकी एयर डिफ़ेंस और सैटेलाइट संचार सिस्टम सहित कई संसाधनों को निशाना बनाया गया.

सबसे बड़ा नुक़सान जॉर्डन के एक एयर बेस पर थाड मिसाइल डिफ़ेंस सिस्टम के लिए इस्तेमाल हो रहे अमेरिकी रडार पर हमले से की वजह से हुआ.

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सीएसआईएस ने रक्षा विभाग के बजट दस्तावेजों की समीक्षा की है जिसके अनुसार एएन/टीपीवाई-2 रडार सिस्टम की क़ीमत लगभग 485 मिलियन डॉलर है. ये एयर डिफ़ेंस सिस्टम लंबी दूरी से बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए इस्तेमाल होते हैं.

ईरान के हमलों से क्षेत्र में अमेरिकी और अमेरिकी बलों के इस्तेमाल किए जा रहे सैन्य ठिकानों पर इमारतों, फ़ेसिलिटीज़ और अन्य ढांचे को अतिरिक्त 310 मिलियन डॉलर का अनुमानित नुक़सान हुआ.

बीबीसी वेरिफ़ाई ने सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण किया है. इसके अनुसार, ईरान ने कम से कम तीन एयर बेस पर कई बार हमला किया है. बार-बार हुए ये हमले यह दिखाते हैं कि ईरान ख़ास अमेरिकी संसाधनों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहा है.

रिपोर्ट के अनुसार रूस ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य बलों से जुड़ी ख़ुफ़िया जानकारी तेहरान के साथ साझा की है.

सैटेलाइट तस्वीरों में तीन एयर बेसों- कुवैत के अली अल-सलीम बेस, क़तर के अल-उदीद और सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान- पर ताज़ा नुकसान दिखाई देते हैं.

28 फरवरी को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इसराइल के साथ मिलकर ईरान पर हमले शुरू करने के बाद से अब तक अमेरिका के 13 सैन्य कर्मियों की भी मौत हो चुकी है.

अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी (एचआरएएनए) के अनुसार कुल मृतकों की संख्या लगभग 3200 तक पहुंच गई है, जिसमें 1400 नागरिक शामिल हैं.

ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को ख़त्म करने, उसकी पारंपरिक सैन्य क्षमता को कमज़ोर करने और क्षेत्र में प्रॉक्सी समूहों को दिए जा रहे समर्थन को रोकने के अपने लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

ट्रंप ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस के एक कार्यक्रम में कहा, "हम ईरान में बेहद अच्छा कर रहे हैं."

लेकिन जंग ने होर्मुज़ स्ट्रेट के लगभग बंद होने, संघर्ष की अवधि को लेकर अनिश्चितता और क्या ट्रंप ज़मीनी सेना भेजेंगे? इन सवालों के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को झटका दिया है.

रडार पर ख़ास निशाना

बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे की सैटेलाइट तस्वीर

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सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण में अमेरिकी कंपनियों द्वारा इन तस्वीरों के जारी करने पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण बाधा आई है.

फिर भी, क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य हितों के ख़िलाफ़ ईरान की जवाबी कार्रवाई में कुछ पैटर्न पहचाने जा सकते हैं.

ईरान के बहरीन में अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर किए गए शुरुआती हमलों के साथ ही रडार और सैटेलाइट सिस्टम निशाने पर आ गए थे. ये आधुनिक सैन्य अभियानों की आंख और कान की तरह काम करते हैं.

सैटेलाइट तस्वीरों में ख़ास तौर पर दो रेडोम (ऐसे संवेदनशील उपकरणों को ढकने वाले सुरक्षात्मक ढांचे) के नष्ट होने की पुष्टि हुई है. बहुत संभावना है कि असली सिस्टम भी क्षतिग्रस्त हुए हों, हालांकि नुक़सान की सीमा का आकलन संभव नहीं है.

कुवैत में अमेरिकी सैन्य सुविधा कैंप अरिफ़जान और सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर रडार साइट्स को निशाना बनाया गया, जहां अमेरिकी विमान मौजूद हैं. बाद की तस्वीरों में थाड एयर डिफ़ेंस सिस्टम के रडार हिस्से से धुआं उठता दिखाई देता है.

यूएई और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर थाड सिस्टम को और अधिक व्यापक नुक़सान हुआ है. इसकी लागत कितनी है, यह स्पष्ट नहीं है. इन सिस्टम्स के कमज़ोर होने के कारण अमेरिका ने कथित तौर पर दक्षिण कोरिया से थाड के कुछ हिस्सों को मध्य पूर्व में फिर से तैनात किया.

ईरान के जवाबी हमलों से हुआ नुक़सान इस युद्ध में अमेरिका के कुल खर्च का केवल एक हिस्सा है.

रिपोर्ट के अनुसार रक्षा विभाग के अधिकारियों ने कांग्रेस को बताया कि युद्ध के पहले छह दिनों में 11.3 अरब डॉलर का खर्च आया.

सीएसआईएस के अनुसार पहले 12 दिनों में यह ख़र्च 16.5 अरब डॉलर हो गया.

पेंटागन इस युद्ध के लिए 200 अरब डॉलर की अतिरिक्त फ़ंडिंग की मांग कर रहा है. रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने गुरुवार को कहा कि यह आंकड़ा "बदल सकता है. बुरे लोगों को मारने के लिए पैसे लगते हैं."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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