इसराइली 'परमाणु ठिकाने' डिमोना के बारे में क्या पता है, जहां ईरान ने किया हमला?

2004 की एक तस्वीर जिसमें डिमोना रिएक्टर स्थल दिखाया गया है

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इमेज कैप्शन, 2004 की एक तस्वीर जिसमें डिमोना रिएक्टर स्थल दिखाया गया है
    • Author, वलीद बदरान
    • पदनाम, बीबीसी
  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

इसराइली एंबुलेंस सेवा ने घोषणा की कि दक्षिणी इसराइल के शहर डिमोना में ईरानी हमले से दर्जनों लोग घायल हो गए हैं.

यह घटना उस चेतावनी के बाद हुई कि ईरान इसराइल की ओर मिसाइलें दाग सकता है.

डिमोना, दक्षिणी इसराइल के नेगेव रेगिस्तान में स्थित है और यहां एक प्रमुख परमाणु संयंत्र है.

इसराइल की अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई साफ़ नीति नहीं है और आधिकारिक तौर पर उसका कहना है कि डिमोना रिएक्टर केवल रिसर्च के लिए है.

इसराइल न तो परमाणु हथियार रखने की पुष्टि करता है और न ही इसका खंडन करता है. हालांकि स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) के अनुसार, उसके पास लगभग 90 परमाणु वॉरहेड हैं, जिससे वह मध्य-पूर्व का एकमात्र परमाणु शक्ति संपन्न देश बन जाता है.

डिमोना क्षेत्र में हमले की ये ख़बर तब सामने आई जब ईरानी अधिकारियों ने पहले घोषणा की थी कि उनकी नतांज़ न्यूक्लियर फ़ैसिलिटी पर हमले हुए हैं.

28 फ़रवरी को अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे.

डिमोना का इतिहास

मोरदखाई वानूनू

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इमेज कैप्शन, पूर्व तकनीशियन मोरदखाई वानूनू ने एक ब्रिटिश अख़बार को कथित तौर पर इसराइली परमाणु हथियारों की तस्वीरें और ब्योरे दिए थे

हालांकि इसराइल ने कभी आधिकारिक तौर पर परमाणु हथियार होने की बात स्वीकार नहीं की, लेकिन अधिकांश अंतरराष्ट्रीय आकलन मानते हैं कि उसके पास ये हथियार हैं. उसका परमाणु कार्यक्रम दुनिया के सबसे गोपनीय हथियार कार्यक्रमों में से एक माना जाता है.

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इसराइल ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं. इस वजह से उसकी परमाणु सुविधाएं इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी की व्यापक निगरानी प्रणाली के तहत नहीं आतीं.

डिमोना रिएक्टर ने 1960 के दशक में काम करना शुरू किया. तभी से इसराइल की परमाणु क्षमता का आकलन काफी हद तक अनिश्चित रहा है.

1980 के दशक में कुछ जानकारी तब सामने आई जब पूर्व तकनीशियन मोरदखाई वानूनू ने एक ब्रिटिश अख़बार को कथित तौर पर इसराइली परमाणु हथियारों की तस्वीरें और विवरण दिए.

इसके बाद इसराइल के परमाणु भंडार के आकलन में बदलाव आया. बताया गया कि 2003 में इसराइल के पास कम से कम 100 और संभवतः 200 तक परमाणु वॉरहेड हैं.

यह भी स्पष्ट प्रमाण नहीं है कि इसराइल ने कभी आधिकारिक परमाणु परीक्षण किया हो, लेकिन कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि वर्ष 1979 में दक्षिण हिंद महासागर में हुआ संदिग्ध परमाणु विस्फोट संभवतः इसराइल का परमाणु परीक्षण हो सकता है.

यह भी अनुमान लगाया जाता है कि यह परीक्षण दक्षिण अफ़्रीका के साथ मिलकर किया गया हो, हालांकि अब तक इसकी पुख़़्ता पुष्टि नहीं हो पाई है.

1948 में इसराइल की स्थापना के कुछ ही समय बाद, उसके कुछ नेताओं ने परमाणु क्षमताओं के विकास में रुचि दिखानी शुरू कर दी.

इसे उन्होंने उस लक्ष्य को हासिल करने का एक ज़रिया माना, जिसे उन्होंने 'अंतिम प्रतिरोधक क्षमता' (फ़ाइनल डेटरेंस) कहा था.

1952 में इसराइल एटॉमिक एनर्जी कमीशन की स्थापना की गई, जिसने सैन्य प्रतिष्ठान के साथ क़रीबी तालमेल के साथ काम किया.

1953 तक इसराइल ने नेगेव रेगिस्तान में मौजूद फॉस्फेट से यूरेनियम निकालना शुरू कर दिया था.

इसके साथ‑साथ उसने परमाणु कार्यक्रम के लिए आवश्यक बुनियादी सामग्रियों के उत्पादन से जुड़ी तकनीकी क्षमताएं भी विकसित कीं.

अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के कुछ शोधकर्ताओं के आकलन के अनुसार, पिछली सदी के पचास के दशक के अंत में फ़्रांस और इसराइल के बीच एक गुप्त समझौता हुआ, जिसके परिणामस्वरूप नेगेव रेगिस्तान में दीमोना परमाणु रिएक्टर का निर्माण किया गया.

जब अमेरिका ने जताई चिंता

दक्षिणी शहर डिमोना में ईरानी मिसाइल हमले के बाद रविवार सुबह घटनास्थल पर मौजूद एक शख़्स

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इमेज कैप्शन, दक्षिणी शहर डिमोना में ईरानी मिसाइल हमले के बाद रविवार सुबह घटनास्थल पर मौजूद एक शख़्स

शुरुआत में डिमोना परिसर को कपड़ा कारखाने, कृषि स्टेशन और खनिज अनुसंधान केंद्र के रूप में पेश किया गया लेकिन 1960 में इसराइल के तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड बेन- गुरियन ने इसे 'शांतिपूर्ण उद्देश्यों' के लिए बना परमाणु अनुसंधान केंद्र बताया.

इससे पहले, 1958 में अमेरिकी यू‑2 जासूसी विमानों से ली गई तस्वीरों में डिमोना में रिएक्टर के निर्माण का पता चलने के बाद, अमेरिका ने चिंता व्यक्त की थी.

पिछली सदी के साठ के दशक में अमेरिकी निरीक्षकों ने इस परिसर का कई बार दौरा किया, लेकिन वे वहां चल रही गतिविधियों की पूरी तस्वीर हासिल नहीं कर सके.

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इसराइल ने परिसर के कुछ हिस्सों को छिपाने के लिए नकली कंट्रोल पैनल और बंद गलियारों जैसी व्यवस्था की थी.

उस समय निरीक्षकों ने कहा कि इतने बड़े रिएक्टर के लिए कोई स्पष्ट नागरिक परमाणु कार्यक्रम नहीं दिखता, जिससे हथियार विकसित करने की संभावना का संकेत मिलता है.

1968 में सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी के आकलन में निष्कर्ष निकाला गया कि इसराइल ने परमाणु हथियार बनाना शुरू कर दिया है.

1986 में मोरदखाई वानूनू ने 'द सन्डे टाइम्स' को इसराइल के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी और तस्वीरें दीं. इससे यह धारणा मजबूत हुई कि इसराइल के पास परमाणु हथियार हैं.

बाद में एक महिला, जो कथित तौर पर इसराइली एजेंट थी, उन्हें लंदन से रोम ले गई, जहां उन्हें नशीला पदार्थ देकर गुप्त रूप से इसराइल ले जाया गया.

उन पर देशद्रोह का मुकदमा चला और 18 साल की सज़ा दी गई.

पूर्व प्रधानमंत्री शिमोन पेरेस ने कहा था कि वानूनू ने जो सीक्रेट लीक किए उसकी वजह से इसराइल की सुरक्षा को गंभीर नुकसान हुआ.

अरब देशों की चिंता

डिमोना और अरद में शनिवार को हुए ईरानी मिसाइल हमले में 100 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं. यह तस्वीर डिमोना में हुए हमले के बाद एएफ़पीटीवी के वीडियो फ़ुटेज से ली गई है

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इमेज कैप्शन, डिमोना और अरद में शनिवार को हुए ईरानी मिसाइल हमले में 100 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं. यह तस्वीर डिमोना में हुए हमले के बाद एएफ़पीटीवी के वीडियो फ़ुटेज से ली गई है

मध्य पूर्व के कई देशों ने इसराइल के संभावित परमाणु कार्यक्रम पर चिंता जताई है.

कुछ देशों ने अमेरिका पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया है. जहां वह इसराइल के कार्यक्रम को नज़रअंदाज़ करता है, वहीं ईरान, इराक़ और सीरिया को ख़तरा बताता है.

2004 में मोहम्मद अलबारदेई आईएईए के महानिदेशक थे. उन्होंने इसराइल से परमाणु अप्रसार संधि में शामिल होने और अपने परमाणु हथियार त्यागने की अपील की थी.

उनका मानना था कि इससे मध्य पूर्व में शांति को मजबूती मिल सकती है.

अलबारदेई ने चेतावनी दी थी कि यह धारणा भ्रामक हो सकती है कि परमाणु हथियार इसराइल को अधिक सुरक्षित बनाते हैं. उल्टे इससे क्षेत्र के अन्य देशों में असुरक्षा की भावना बढ़ सकती है.

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