भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने सिख अलगाववादी पन्नू की हत्या की साज़िश की बात कबूली

गुरपतवंत सिंह पन्नू (फाइल फोटो)

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एक भारतीय व्यक्ति ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क में सिख अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की 2023 में हत्या की नाकाम साज़िश रचने के आरोप में दोष स्वीकार किया है.

अमेरिकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि यह उस मामले में पहली बार अपराध स्वीकार किया गया है, जिसे कनाडा और अमेरिका के अधिकारियों ने भारत सरकार की ओर से असंतुष्टों की हत्या के अभियान से जुड़ा बताया था.

54 साल के निखिल गुप्ता ने मैनहैटन के फेडरल कोर्ट में सुपारी देकर हत्या, हत्या की साज़िश और मनी लॉन्ड्रिंग की साज़िश के आरोपों में दोष स्वीकार किया.

अभियोजकों का अनुमान है कि गुप्ता को इस मामले में लगभग 24 वर्ष तक की सज़ा हो सकती है. भारत सरकार इन आरोपों में अपनी संलिप्तता से इनकार करती रही है.

गुरपतवंत सिंह पन्नू न्यूयॉर्क स्थित 'सिख्स फॉर जस्टिस' नामक समूह में वकील हैं. वह अमेरिकी नागरिक हैं और खालिस्तान समर्थक हैं. फ़ैसले के बाद अलगाववादी आंदोलन के समर्थकों ने अदालत में नारे लगाए.

13 फ़रवरी को जारी न्यूयॉर्क के साउथ डिस्ट्रिक्ट के अटॉर्नी कार्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक़ सज़ा 29 मई को सुनाई जाएगी.

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अभियोजन पक्ष ने गुप्ता पर आरोप लगाया कि उन्होंने एक भारतीय सरकारी अधिकारी के साथ मिलकर न्यूयॉर्क में सिख्स फ़ॉर जस्टिस के वकील और दोहरी अमेरिकी-कनाडाई नागरिकता रखने वाले गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साज़िश रची.

भारत सरकार ने पन्नू के ख़िलाफ़ किसी भी साज़िश से खुद को अलग बताते हुए कहा कि यह 'सरकार नीति के ख़िलाफ़' है और इन साज़िशों में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया है.

डीईए

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इमेज कैप्शन, अमेरिकी न्याय विभाग का कहना है कि क़ानून प्रवर्तन एजेंसियों की सतर्कता से हत्या की साज़िश को विफल किया गया.

अमेरिकी न्याय विभाग ने क्या बताया

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सुनवाई के दस्तावेजों के अनुसार निखिल गुप्ता ने कहा, "मैंने एक अन्य व्यक्ति के साथ अमेरिका में एक व्यक्ति की हत्या कराने पर सहमति दी और इस अपराध को अंजाम देने के लिए न्यूयॉर्क में किसी को 15,000 डॉलर का भुगतान किया."

निखिल गुप्ता को 2023 में चेक गणराज्य में गिरफ़्तार किया गया था, जहाँ से प्रत्यर्पण के बाद उन्हें अमेरिका लाया गया. लेकिन उन्होंने ख़ुद को निर्दोष बताया था, जिसके बाद जून 2024 से ही उन्हें ब्रुकलिन की जेल में रखा गया है.

गुप्ता के ख़िलाफ़ अभियोग पत्र में एक साहसिक साज़िश का विवरण दिया गया है, जिसमें भारतीय सरकारी अधिकारी विकास यादव ने मई 2023 में गुप्ता को पन्नू की हत्या की योजना बनाने के लिए नियुक्त किया.

अभियोग पत्र के अनुसार, गुप्ता ने विकास यादव और अन्य लोगों को अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थों और हथियारों की तस्करी में अपनी संलिप्तता के बारे में बताया था.

बयान में 2024 में जारी दूसरे संशोधित अभियोग का हवाला देते हुए कहा गया है, "साल 2023 में निखिल गुप्ता ने भारत और अन्य जगहों पर कुछ लोगों के साथ मिलकर, जिनमें सह-अभियुक्त विकास यादव भी शामिल हैं, जो उस समय भारत सरकार के कर्मचारी थे, एक वकील और राजनीतिक कार्यकर्ता पन्नू की हत्या की साज़िश रची."

बयान के अनुसार, "निखिल गुप्ता भारत के नागरिक हैं और भारत में रहते थे. उन्होंने विकास यादव और अन्य लोगों के साथ इलेक्ट्रॉनिक संदेशों में ख़ुद को अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ और हथियार तस्कर बताया है. विकास यादव भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय में कार्यरत थे, जहाँ देश की ख़ुफ़िया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) काम करती है."

न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है, ''यह मामला जून 2023 में बाइडन प्रशासन के लिए असहज स्थिति का कारण बन गया था. यह मामला तब आया जब बाइडन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अमेरिका के राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को गहरा करने की कोशिश कर रहे था. पीएम मोदी को बाइडन ने स्टेट विजिट पर आमंत्रित किया था. अभियोजकों के अनुसार, उसी यात्रा के दौरान एक वरिष्ठ भारतीय अधिकारी ने हत्या की साज़िश को मंज़ूरी दी.''

अमेरिकी अदालत में पेश दस्तावेज़ में कथित पेमेंट के लेन-देन की तस्वीर

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अंडर कवर अधिकारी को दिया हत्या का कॉन्ट्रैक्ट

अटार्नी कार्यालय के बयान में जो कुछ कहा गया है, उसे पढ़िए-

मई 2023 के आसपास विकास यादव ने अमेरिका में पन्नू की हत्या की साज़िश को अंजाम देने के लिए निखिल गुप्ता को शामिल किया.

विकास यादव के निर्देश पर निखिल गुप्ता ने एक ऐसे व्यक्ति से संपर्क साधा, जिस पर उन्हें अपराध में सहयोग करने का भरोसा था, लेकिन वह वास्तव में डीईए (ड्रग एनफ़ोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन) के साथ काम कर रहा एक गोपनीय सूत्र था.

इस व्यक्ति से न्यूयॉर्क सिटी में पन्नू की हत्या के लिए एक कॉन्ट्रैक्ट किलर अरेंज करने में मदद मांगी गई.

गोपनीय सूत्र ने निखिल गुप्ता की मुलाक़ात एक कथित कॉन्ट्रैक्ट किलर से कराई, जो असल में डीईए का अंडरकवर अधिकारी था. बाद में निखिल गुप्ता की मध्यस्थता में हुई बातचीत में विकास यादव ने उस अंडरकवर अधिकारी को हत्या के बदले एक लाख डॉलर देने पर सहमति जताई.

नौ जून 2023 के आसपास विकास यादव और निखिल गुप्ता ने एक सहयोगी के ज़रिये उस अंडरकवर अधिकारी तक एडवांस के तौर पर 15 हजार डॉलर नक़द पहुंचाने की व्यवस्था की.

हत्या की साज़िश को आगे बढ़ाने के लिए जून 2023 के आसपास विकास यादव ने निखिल गुप्ता को पन्नू से जुड़ी सारी निजी जानकारी दी. इसमें न्यूयॉर्क सिटी स्थित घर का पता, फ़ोन नंबर और रोज़मर्रा की गतिविधियों का ब्योरा शामिल था.

निखिल गुप्ता ने यह जानकारी आगे अंडरकवर अधिकारी को बढ़ा दी. इसके बाद उन्होंने नियमित रूप से विकास यादव को साज़िश की प्रगति की जानकारी देते रहे, जिसमें पीड़ित की निगरानी की तस्वीरें भी शामिल थीं.

सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा में हत्या कर दी गई थी

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निज्जर की हत्या

अटॉर्नी ऑफ़िस के बयान के अनुसार, हत्या की सुपारी देने के लिए अधिकतम 10 साल की सज़ा, हत्या की सुपारी देने की साज़िश रचने के लिए अधिकतम 10 साल की सज़ा और मनी लॉन्ड्रिंग की साज़िश रचने के लिए अधिकतम 20 साल की सज़ा हो सकती है.

बयान में ये भी कहा गया है कि अधिकतम सज़ा कांग्रेस की ओर से बताई गई है और सिर्फ़ जानकारी के लिए है, लेकिन इस मामले अधिकतम सज़ा जज तय करेंगे.

एफ़बीआई के सहायक निदेशक रोमन रोजावस्की के हवाले से बयान में कहा गया है, "निखिल गुप्ता ने एक अमेरिकी नागरिक के ख़िलाफ़ सुपारी देकर हत्या की साज़िश में अहम भूमिका निभाई. यह हत्या अमेरिकी क़ानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई की वजह से रोकी जा सकी."

रोजाहावस्की ने कहा, "अमेरिकी नागरिक को केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का इस्तेमाल करने के कारण अंतरराष्ट्रीय दमन का निशाना बनाया गया. एफ़बीआई का संदेश साफ़ है कि आप दुनिया में कहीं भी हों, अगर आप हमारे नागरिकों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे तो हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक आपको न्याय के कटघरे में नहीं लाया जाता."

वीडियो कैप्शन, कनाडा,अमेरिका और ब्रिटेन से कैसे जुड़े थे खालिस्तान आंदोलने के तार

भारत सरकार का क्या कहना है?

भारत ने पिछले साल नवंबर में अमेरिका की ओर से उठाई गई सुरक्षा चिंताओं पर विचार करने के लिए एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की थी. विदेश मंत्रालय ने कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को देखते हुए ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया जाता है.

अक्तूबर 2024 में भारतीय विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि पन्नू के ख़िलाफ़ नाकाम हत्या की साज़िश से जुड़े अमेरिकी न्याय विभाग के अभियोग में जिस व्यक्ति (विकास यादव) का नाम सामने आया था, वह अब भारत सरकार की सेवा में नहीं है.

मूल अभियोग में सरकारी अधिकारी को "सीसी-1" कहा गया था. अक्तूबर 2024 में ही अमेरिकी अधिकारियों ने दूसरा संशोधित अभियोग सार्वजनिक किया, जिसमें "सीसी-1" की पहचान विकास यादव के रूप में की गई.

बाद में विदेश मंत्रालय ने कहा, "अमेरिकी विदेश विभाग ने हमें सूचित किया कि अभियोग में उल्लेखित व्यक्ति अब भारत में कार्यरत नहीं है. हम पुष्टि करते हैं कि वह अब भारत सरकार के कर्मचारी नहीं हैं."

गुरपतवंत सिंह पन्नू

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इमेज कैप्शन, गुरपतवंत सिंह पन्नू 90 के शुरुआती दशक में अमेरिका चले गए थे

कौन हैं गुरपतवंत सिंह पन्नू

पेशे से वकील पन्नू का परिवार पहले पंजाब के नाथू चक गांव में रहता था, जो बाद में अमृतसर के पास खानकोट में बस गया. पन्नू के पिता महिंदर सिंह पंजाब मार्केटिंग बोर्ड के सचिव थे.

पन्नू के एक भाई और एक बहन हैं. उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा लुधियाना में ली. 1990 के दशक में पन्नू ने पंजाब यूनिवर्सिटी से क़ानून की पढ़ाई की. वे अपने कॉलेज के दिनों से ही छात्र राजनीति में सक्रिय हो गए थे.

साल 1991-92 वे पन्नू अमेरिका चले गए, जहां उन्होंने कनेक्टिकट यूनिवर्सिटी में दाख़िला लिया. यहां से उन्होंने फ़ाइनेंस में एमबीए की और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से क़ानून की डिग्री ली.

अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद 2014 तक पन्नू ने न्यूयॉर्क में वॉल स्ट्रीट में सिस्टम एनालिस्ट के रूप में काम किया, इस दौरान वे राजनीतिक रूप से भी सक्रिय रहे.

साल 2007 में पन्नू ने सिख फ़ॉर जस्टिस की स्थापना की थी. संगठन का पंजीकृत कार्यालय अमेरिका के वॉशिंगटन में है, वहीं पन्नू न्यूयॉर्क के ऑफ़िस से काम करते हैं, जहां वे अपनी लॉ फर्म भी चलाते हैं.

भारतीय पंजाब को 'आज़ाद' कराने और खालिस्तान नारे के तहत पंजाबियों को आत्मनिर्णय का अधिकार दिलाने के लिए 'सिख फॉर जस्टिस' ने 'रेफरेंडम-2020' अभियान शुरू किया था.

इसके तहत पंजाब और दुनियाभर में रहने वाले सिखों को ऑनलाइन वोट करने के लिए कहा गया था, लेकिन वोटिंग से पहले ही भारत सरकार ने 40 वेबसाइटों को सिख फ़ॉर जस्टिस और खालिस्तान समर्थक बताकर बैन कर दिया था.

यह संगठन ख़ुद को मानवाधिकार संगठन बनाता है, लेकिन भारत इसे 'आतंकवादी' संगठन घोषित कर चुका है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.