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ब्रेकफ़ास्ट का क्या है सही तरीका, क्या खाएं जिससे सेहत को हो फ़ायदा
- Author, जैस्मीन फॉक्स-स्केली
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
ब्रेकफ़ास्ट में सीरियल्स या अनाज खाना एक अच्छा विकल्प हो सकता है क्योंकि ये फ़ाइबर और विटामिन का अच्छा सोर्स होते हैं.
हमें अक्सर बताया जाता है कि ब्रेकफ़ास्ट हमारे दिन के खाने का कितना ज़रूरी हिस्सा है. अगर सुबह अच्छा नाश्ता किया जाए तो आपके शरीर में दिन में आने वाली मुश्किल स्थितियों का सामना करने की उर्जा रहती है.
फिर भी ब्रेकफ़ास्ट में क्या खाया जाए या फिर बच्चों को नाश्ते में क्या दिया जाए, ये तय करना मुश्किल होता है.
अगर आप अमेरिका की 53 फ़ीसदी आबादी की तरह हर हफ्ते ब्रेकफ़ास्ट में अनाज खाने का फैसला करते हैं तो हमारे पास कई विकल्प हैं.
ओट्स, मूसली और कॉर्न फ़्लेक्स जैसे हेल्दी विकल्प हमें पर्याप्त पोषक तत्व मुहैया कराते हैं. ऐसे विकल्पों को अंग्रेज़ी में सीरियल्स कहते हैं. लेकिन कुछ साइंटिस्ट चेतावनी देते हैं कि ये अल्ट्रा प्रासेस्ड फूड हैं और ये हमारे लिए अच्छा नहीं है.
तो इस बात की हकीक़त क्या है और अगर हमें ब्रेकफ़ास्ट में सीरियल्स खाना है तो वो किस तरह का होना चाहिए?
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ऐसे भोजन में होते हैं बेहद ज़रूरी तत्व
सबसे पहले तथ्यों की बात करते हैं.
सीरियल्स यानी अनाज में गेहूं, चावल, जई, जौ और मक्का शामिल हैं. हर एक अनाज के तीन मुख्य कंपाउंड्स होते हैं.
अनाज की बाहरी परत में फ़ाइबर, विटामिन बी और मिनरल्स होते हैं.
इसके बाद अनाज में स्टार्च और प्रोटीन होते हैं जो पौधे के भ्रूण के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं और आख़िर में भ्रूण में भरपूर मात्रा में ऑयल, विटामिन और मिनरल्स होते हैं.
अनाज को नाश्ते में बदलने का विचार सबसे पहले अमेरिकी फिजिशियन जॉन हार्वे के दिमाग में आया.
उस समय वे बैटल क्रीक सैनिटोरियम के अधीक्षक थे. मरीजों की डाइट में सुधार के लिए जॉन हार्वे ने कुछ नए तरह के खाने की तलाश की. इसमें ग्रेनोला और कॉर्न फ़्लेक्स शामिल था.
अब ये सब मार्केट में लगभग हर जगह मौजूद हैं और इनके कई सारे जेनेरिक वर्ज़न मौजूद हैं.
ब्रेकफ़ास्ट में खाया जाने वाला अनाज औद्योगिक उत्पादन का हिस्सा भी बन चुका है. कटाई के बाद ये अनाज पैकेजिंग में आने तक कई तरह के प्रासेस से गुजरता है और फिर उसे सुपरमार्केट में भेजा जाता है.
कुछ अनाज साबुत होते हैं. वहीं कुछ में बाहरी परत को हटा दिया जाता है. कुछ अनाज ऐसे भी होते हैं जिन्हें इससे आगे की प्रक्रिया से गुजरना होता है और उन्हें आटे के रूप में पीसा जाता है.
अंतिम रूप से जो उत्पाद तैयार होता है उसमें नमक, शुगर या फिर दूसरे तत्व जैसे विटामिन या मिनरल्स मिक्स कर दिए जाते हैं.
फिर उन्हें पकाया जाता है और फ़्लेक्स या फिर दूसरे फ़ॉर्म में बदल दिया जाता है. इसके बाद इसे बेक या फिर टोस्ट किया जाता है.
चूंकि अनाज विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होते हैं इसलिए इन्हें तमाम पोषक तत्व मुहैया करवाने के लिए पर्याप्त माना जाता है.
ये बात उन लोगों के लिए भी सही है जिनकी खुराक सीमित होती है उन्हें भोजन से उतना विटामिन नहीं मिल पाता जितनी उनके शरीर को ज़रूरत होती है.
वेजिटेरियन या वीगन डाइट को उदाहरण के तौर पर लिया जाए तो इनमें विटामिन बी12 की कमी होती है. जो दूध का सेवन नहीं करते हैं उन्हें पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम और विटामिन डी नहीं मिल पाता है.
जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है कुछ पोषक तत्वों को ग्रहण करने की क्षमता कमजोर हो जाती है जिससे कुपोषण का ख़तरा बढ़ सकता है. वहीं गर्भवती महिलाओं और बच्चों को भी पोषक तत्वों की कमी का अधिक ख़तरा होता है.
रिसर्च से मालूम चलता है कि ब्रेकफ़ास्ट में इस तरह का अनाज खाने के कुछ फ़ायदे होते हैं.
अमेरिका में हुए एक अध्ययन में पाया गया कि अतिरिक्त पोषक तत्वों से भरपूर (फ़ोर्टिफ़ाइड) भोजन के बिना बच्चों और किशोरों के एक बड़े हिस्से को पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिलेंगे.
मिश्रित अनाज वाले नाश्ते में फ़ाइबर अधिक होता है. ये एक ऐसा पोषक तत्व जो हमारे पेट में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाता है. इसकी 90 फ़ीसदी लोगों में कमी रहती है.
किस तरह के अनाज में शुगर की मात्रा ज्यादा होती है
किंग्स कॉलेज लंदन में न्यूट्रिशन की प्रोफ़ेसर सरा बेरी कहती हैं, "फ़ोर्टिफ़ाइड अनाज कुछ विटामिनों और खनिजों की पूर्ति में उपयोगी योगदान दे सकते हैं."
बेरी उदाहरण देती हैं कि ब्रिटेन में 11 से 18 साल की उम्र की करीब 50 फ़ीसदी लड़कियों में आयरन की कमी होती है. वहीं अमेरिका में 14 फ़ीसदी वयस्कों में आयरन की कमी है.
वो कहती हैं, "लेकिन ध्यान रखने की ज़रूरत होती है. कुछ अनाजों में शुगर ज़्यादा होती है और फ़ाइबर कम. फल और सब्जियां भी विटामिन और मिनरल्स हासिल करने का एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं."
ब्रिटिश हार्ट फ़ाउंडेशन की एक रिसर्च के मुताबिक़, 30 ग्राम कॉर्न फ्लेक्स में लगभग 11 ग्राम शुगर होती है.
एक ही बार में ज़्यादा शुगर लेने की वजह से ब्लड शुगर में तेजी आ सकती है. इससे एक वक़्त के बाद डायबिटीज या दिल से जुड़ी बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है.
बेरी कहती हैं कि इस तरह के अनाज का हमारे स्वास्थ्य पर बुरा असर हो सकता है. लेकिन वो कहती हैं कि अभी इसके बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है.
सेहत पर किस तरह का प्रभाव पड़ता है?
हालांकि हर कोई इस बात से सहमत नहीं है.
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सभी अल्ट्रा प्रासेस्ड फूड हानिकारक नहीं होते हैं. इसके साथ ही ब्रेकफ़ास्ट में खाए जाने वाले सभी तरह के अनाज एक जैसे नहीं होते.
प्रोफ़ेसर सरा बेरी मूसली को हेल्दी विकल्प मानती हैं. उनका कहना है कि अगर प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर ब्रेकफ़ास्ट किया जाए तो उससे एनर्जी मिलती है और आपको जल्दी भूख भी नहीं लगती है.
अमेरिका में ओट्स ब्रेकफ़ास्ट में काफ़ी पॉपुलर है. करीब 5 लाख लोगों से जुड़ी एक रिसर्च में इसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में बात की गई है.
रिसर्च में सामने आया है कि जिन्होंने ज़्यादा ओट्स का सेवन किया उनमें कम सेवन करने वालों की तुलना में डायबिटीज-टू होने की आशंका 22 फ़ीसदी कम रही.
ओट्स से फ़ायदा पहुंचाने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक फ़ाइबर है. कई रिसर्च में यह पाया गया है कि बीटा ग्लूकेन कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है ख़ासकर लिपोप्रोटीन (एलडीएल) को, जो हृदय रोग से जुड़ा बैड कोलेस्ट्रॉल है.
बारीक पिसी हुई जई से बनाए गए कई तरह के ओट्स से इस तरह के फ़ायदे नहीं देखने को मिले हैं.
जई के आटे से बने ओट्स तेजी से पच जाते हैं और उनसे शरीर में बहुत कम समय में अधिक शुगर रिलीज़ होती है जिसका सीधा असर ब्लड सर्कुलेशन पर पड़ता है.
एक क्लिनिकल ट्रायल में वॉलंटियर्स को एक दिन रोल्ड ओट्स और दूसरे दिन इंस्टेंट बारीक पिसे हुए ओट्स खाने को कहा गया.
पाया गया कि ओट्स में फ़ाइबर, प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट की समान मात्रा होने के बावजूद बारीक पिसे हुए ओट्स खाने वालों में ब्लड शुगर का स्तर अधिक बढ़ गया.
अगर ब्रेकफ़ास्ट में इस्तेमाल किए जाने वाले अनाज की ऊपरी सतह को हटा दिया जाता है तो उसके फ़ायदों में भी कमी हो जाती है.
स्टडी से मालूम चला है कि साबुत अनाज खाने वालों में कैंसर और टाइप-टू डायबिटीज जैसी बीमारियों का ख़तरा कम हो जाता है.
लेकिन अनाज को रिफ़ाइन्ड कर दिया जाए तो हेल्थ को मिलने वाले फ़ायदों में भी कमी हो जाती है.
इटली की पाविया यूनिवर्सिटी में न्यूट्रिशनिस्ट रिकार्डो कावलॉन्जा कहते हैं, "साबुत अनाज फायदेमंद होता है क्योंकि ये फ़ाइबर से भरपूर होता है."
वो फ़ाइबर के एक महत्वपूर्ण गुण के बारे में बात करते हुए कहते हैं कि इससे खाना धीरे-धीरे पचता है और ग्लूकोज कंट्रोल में रहता है.
लेकिन आपने अगर फ़ाइबर को हटा दिया तो फिर ग्लूकोज तेजी से बनता है.
सवाल ये है कि ब्रेकफ़ास्ट में अनाज का सेवन हमारे लिए अच्छा है या बुरा?
तो इसका जवाब है कि ये पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस तरह का अनाज खा रहे हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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