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साढ़े आठ किलोमीटर सड़क के लिए 697 पेड़ काटने का मामला क्या है
- Author, श्रीकांत बंगाले
- पदनाम, बीबीसी मराठी संवाददाता
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
"अगर आप इस पेड़ को ध्यान से देखें, तो यह इंसान की क्षमता से बाहर का पेड़ है. आज हम इस तरह के पेड़ लगाकर उन्हें ज़िंदा रख पाएंगे, इसकी कोई संभावना नहीं है. पेड़ों का जो यह विशाल आकार होता है, वह इंसानी बस से बाहर होता है."
पर्यावरण कार्यकर्ता रूपेश कलंत्री, छत्रपति संभाजीनगर में नगर नाका से दौलताबाद जाने वाली सड़क पर लगे एक विशाल बरगद के पेड़ की ओर इशारा करते हुए यह बात कह रहे थे.
इस पेड़ समेत कुल 697 पेड़ों को काटा जाना है, क्योंकि फिलहाल दो लेन वाली इस सड़क को चार लेन में बदला जा रहा है.
नगर नाका से दौलताबाद की ओर बढ़ते ही सड़क चौड़ीकरण का काम शुरू हुआ दिखाई देता है. सड़क के विस्तार के लिए हो रही इस पेड़ कटाई का शहर के पर्यावरण प्रेमियों ने विरोध किया है.
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रूपेश कलंत्री कहते हैं, "हम सोचते ही ऐसे हैं कि सवाल खड़ा कर देते हैं, आपको सड़क चाहिए या पेड़? आपको विकास चाहिए या पर्यावरण? ऐसा क्यों होना चाहिए? यह या वह क्यों? दोनों साथ क्यों नहीं हो सकते?"
वह आगे कहते हैं, "पहली प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि सारे पेड़ कैसे बचें, और उसके बाद सड़क बनाने की योजना तैयार की जाए."
'697 पेड़ काटना यानी मौत की ओर बढ़ना'
छत्रपति संभाजीनगर में नगर नाका से दौलताबाद टी-पॉइंट तक की साढ़े आठ किलोमीटर लंबी सड़क के चौड़ीकरण के लिए जिन पेड़ों को काटा जाना है, उन पर नंबर लगाए जा चुके हैं. पहले एक किलोमीटर के हिस्से में सड़क चौड़ीकरण का काम शुरू कर दिया गया है.
सड़क के किनारे कुछ पेड़ कटे हुए दिखाई देते हैं. इनमें कुछ छोटे हैं, तो कुछ बहुत बड़े.
नगर निगम की वृक्ष प्राधिकरण समिति के सदस्य डॉक्टर किशोर पाठक ऐसे ही एक कटे हुए पेड़ के बारे में कहते हैं, "यह जो पेड़ आप देख रहे हैं, यह 35 साल पुराना था. यह कम से कम डेढ़ से दो हज़ार लोगों को ऑक्सीजन देने वाला पेड़ था. इस पर अलग-अलग तरह की जैव विविधता निर्भर रहती है."
"छिपकलियां, गेको, कीड़े, तितलियों से लेकर पक्षी तक. ये छिपकलियां आपके खेतों के कीट खा जाती हैं. रात में इसी पेड़ पर ठहरने वाले बगुले दिन भर आपके कूड़ेदानों को साफ करते हैं, वहां के कीड़े और बचा-खुचा खाना खाकर."
सड़क को चार लेन का बनाने के लिए 200 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंज़ूरी मिल चुकी है. कुल 697 पेड़ों को काटा जाना है और इसके बदले दस गुना पेड़ लगाने की बात कही जा रही है. वहीं सड़क चौड़ीकरण के लिए 70 बरगद के पेड़ों का पुनर्रोपण (रिप्लांटेशन) भी किया जाएगा.
डॉक्टर बीएल चव्हाण, डॉक्टर बाबा साहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रमुख हैं.
वह कहते हैं, "जो पेड़ आमतौर पर 10 साल से ज़्यादा पुराने होते हैं, वे हर साल कम से कम एक-दो लोगों के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन देते हैं. यानी हमारे अस्तित्व के लिए पेड़ों का होना बेहद ज़रूरी है. पेड़ों का नष्ट होना ऑक्सीजन की कमी की ओर ले जाता है. जैसे किसी मरीज़ की मौत ऑक्सीजन की कमी से हो सकती है, उसी तरह अगर तुलना करें तो हम भी उसी दिशा में बढ़ रहे हैं."
'यह इलाका उजाड़ हो जाएगा'
सड़क निर्माण को लेकर छत्रपति संभाजीनगर के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधीक्षक अभियंता सुंदरदास भगत ने बीबीसी मराठी से कहा, "सड़क को चार लेन बनाने का काम शुरू हो चुका है. ये पेड़ दो विभागों वन विभाग और नगर निगम, की सीमा में आते हैं. वन विभाग के अंतर्गत आने वाले पेड़ों की कटाई की अनुमति मिल चुकी है और वहां काम चल रहा है."
"नगर निगम की सीमा में आने वाले पेड़ों को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई थीं. आयुक्त ने इस पर सुनवाई की है. अंतिम आदेश आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. विभाग की कोशिश है कि ज़्यादा से ज़्यादा पेड़ बचाए जा सकें. कुछ पेड़ों को रिप्लांट किया जाएगा, जबकि छोटे पेड़ों को काटा जाएगा."
फ़िलहाल इस सड़क के दोनों तरफ बड़ी संख्या में पेड़ हैं, जिनकी वजह से अच्छी-खासी छाया रहती है. इसी छाया में कई छोटे दुकानदार फल, जूस बेचते नज़र आते हैं. हमने इनमें से कुछ विक्रेताओं से बात की.
उनका कहना था कि अगर ये पेड़ काट दिए गए, तो यह हमारे पेट पर लात मारने जैसा होगा, यानी हमारी रोज़ी-रोटी ही खत्म हो जाएगी.
कुछ लोगों ने यह भी कहा कि अगर पेड़ कट गए, तो यह पूरा इलाका बिल्कुल उजाड़ और बेजान हो जाएगा.
रूपेश कलंत्री कहते हैं, "एक तरफ़ हमें नगर निगम की सुनवाई में उलझाकर रखा गया, और दूसरी तरफ़ वन विभाग की अनुमति लेकर चुपचाप पेड़ों की कटाई शुरू कर दी गई. ऐसा कौन-सा विकास है, जिसे छुप-छुपकर करना पड़े?"
"कोई भी पर्यावरण प्रेमी यह नहीं कह रहा कि सड़क नहीं चाहिए. सड़क की ज़रूरत है, इसमें कोई दो राय नहीं. लेकिन ज़रूरत को देखते हुए यह भी तो देखा जाना चाहिए कि कितने पेड़ों को बचाया जा सकता है. यहां तो विरासत वाले पेड़ हैं, इनकी उम्र 300-300 साल तक की हो सकती है."
मामला एनजीटी में पहुंचा
सड़क के चौड़ीकरण से जुड़े इस मामले में कानूनी प्रक्रिया पूरी हुई है या नहीं, यह जानने के लिए एडवोकेट निरंजन देशपांडे ने एनजीटी यानी राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण में याचिका दाख़िल की है.
एडवोकेट निरंजन देशपांडे बताते हैं, "जब कोई भी प्लानिंग अथॉरिटी अनुमति के लिए आवेदन करती है, तो सबसे पहले निरीक्षण किया जाता है. आपत्तियां आमंत्रित करनी होती हैं. सार्वजनिक नोटिस देना ज़रूरी होता है. आवेदन के साथ वैकल्पिक योजना भी देनी पड़ती है. हमें शक है कि क्या इन सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है या नहीं. इसी वजह से हम बार-बार आपत्ति दर्ज करा रहे हैं."
जिन पेड़ों को काटा जाना है, उन सभी पर नंबर लगाए जा चुके हैं.
फ़िलहाल जो दो लेन की सड़क मौजूद है, वह काफ़ी संकरी है. वहां अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं और ट्रैफिक जाम की समस्या भी बनी रहती है. इसी आधार पर सड़क को चार लेन का बनाने की ज़रूरत बताई जा रही है.
पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि उन्हें सड़क से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उनकी शिकायत यह है कि पेड़ों के पुनर्रोपण (रिप्लांटेशन) के जो प्रयोग किए जाते हैं, वे ज़्यादातर सफल नहीं हो पाते.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.