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काले हिरण के शिकार मामले में जिनकी गवाही से जेल पहुंचे सलमान ख़ान
- Author, नारायण बारेठ
- पदनाम, जयपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
उन आँखों ने शिकार का मंजर कोई 19 साल तक सहेजे रखा. काले हिरणों के शिकार का मुक़दमा लंबा चला.
इसमें बहुत उतर चढ़ाव आए. मगर बिश्नोई समाज के गवाह न रुके, न थके. उन्ही गवाहों के बयानों ने फ़िल्म स्टार सलमान ख़ान के लिए सज़ा की इबारत लिख दी.
इनमें जोधपुर ज़िले में कांकाणी गांव के पूनम चंद बिश्नोई और भारमल बिश्नोई का नाम प्रमुख है.
कांकाणी के पूनम चंद बिश्नोई ने फ़ोन पर ज़रूर थोड़ी बात की. लेकिन कहा वे अभी ज़्यादा बातचीत के लिए उपलब्ध नहीं हैं. वो बोले जो देखा अदालत को बता दिया.
मैंने हिरणों का बिखरा ख़ून देखा
भारमल बिश्नोई ने अपने गांव कांकाणी में बीबीसी से कहा, "मैंने शिकार के तुरंत बाद वहां हिरणों का बिखरा ख़ून देखा और इसी नाते मेरा नाम गवाही में लिखा गया."
72 साल के भारमल बिश्नोई खेती और पशुपालन करते रहे हैं. वो कहते हैं, "अदालत में वही बयान किया जो देखा था."
बिश्नोई कहते हैं दबाव की कोई बात नहीं. वो कहते हैं, "मुझसे जिरह भी की गई. पूछा गया आपने कितने मीटर दूर से देखा, मैंने कहा मीटर का नाप तो नहीं समझता. मगर ये पचास क़दम दूर से देखा था. वहां पत्थरों पर हिरणों के शिकार का ख़ून था. पत्थर ख़ून से सना था."
मेरी याददाश्त की जांच की गई
बिश्नोई कहते हैं कि उनसे उनकी याददाश्त के बारे में कुछ यूँ पूछा गया कि उनकी शादी कब हुई थी. "मैंने कहा बचपन में हो गई थी."
वो घटना के अतीत में लौटते हैं और कहते हैं वन विभाग ने पहले उनसे जो देखा उसके बारे में पूछा और फिर गवाही में नाम लिखा.
उन्होंने कहा, "वहां पत्थर कंकर हिरणों के ख़ून से सने थे. गवाही में मैंने इसी की पुष्टि की.
"वकीलों ने पूछा कि ये घटना कब की है. मैंने बता दिया ये 1998 का मामला है."
बिश्नोई कहते हैं कि वो इस मुक़दमे के फ़ैसले से खुश हैं. वो कहने लगे, "हम तो वन्य प्राणियों के लिए अपनी जान हाज़िर रखते हैं. मुझे इस फ़ैसले पर ख़ुशी हुई है."
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