कठुआ रेप मामले के एक साल बाद भी परिवार को इंसाफ़ का इंतज़ार: ग्राउंड रिपोर्ट

    • Author, मोहित कंधारी
    • पदनाम, जम्मू से, बीबीसी हिंदी के लिए

"वो कहते थे 90 दिन में इंसाफ मिल जायेगा, लेकिन पूरा एक साल बीत गया है हमें अभी भी इंसाफ नहीं मिला." इतना कहते ही कठुआ ज़िले के रसाना गांव की आठ साल की बकरवाल लड़की की माँ अपनी आँखें भर लेती हैं और रोने लगती हैं.

वो कहती हैं, "हमें आज भी 24 घंटे अपनी बच्ची की याद सताती है. वो खेलते-खेलते घर आती थी और मुझसे कहती थी, 'माँ मुझे रोटी दे दो'. उसे फल खाना भी अच्छा लगता था. वो अपने पिता से संतरा, केला और बिस्कुट लाने को कहती थी."

"एक साल हो गया उसे नहीं देखा, खेलते-खेलते उसको उठा कर ले गए और बेरहमी से मार डाला, बदतमीज़ी की उस बच्ची के साथ."

बच्ची की मां कहती है, "मुझे नहीं पता हमें इंसाफ़ मिलेगा या नहीं. वो अपनी बीमारी से मर जाती तो हमें इतना ग़म नहीं होता. सोते जागते उसका चेहरा नज़र के सामने आता है. मैंने आज भी उसके खिलौने और कुछ कपड़े संभाल कर रखे हैं."

उसकी 'गुड़िया' हाथ में लेकर माँ बोलती है, 'यह गुड़िया उसने अपने हाथों से अलमारी में रखी थी, लेकिन हमारी गुड़िया खुद चली गयी."

हफ़्तेभर किया था सामूहिक बलात्कार

पिछले साल जनवरी में जम्मू के कठुआ ज़िले में बकरवाल समुदाय की एक नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप कर उसकी हत्या कर दी गई थी.

पुलिस के मुताबिक़ आठ साल की उस बच्ची को देवस्थान (पूजा स्थल) में क़ैद रखा गया. हफ़्ते भर उसके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ.

यहां तक कि गला घोंटकर मारे जाने से चंद मिनट पहले तक बलात्कार होता रहा और फिर लाश जंगल में फेंक दी गई. इस मामले को लेकर देश भर में प्रदर्शन हुए थे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग उठी थी.

जांच एजेंसी ने इस मामले में मास्टरमाइंड सांझी राम और उनके बेटे विशाल कुमार समेत नौ अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया था.

इसमें एक पुलिस हेड कॉन्स्टेबल, दो एसपीओ और एक सब-इंस्पेक्टर भी शामिल हैं.

मई 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने कठुआ गैंगरेप और हत्या मामले को पंजाब के पठानकोट स्थानांतरित कर दिया था.

इस समय मामले की सुनवाई लगातार चल रही है और रियासत की क्राइम ब्रांच की टीम ने अपने गवाह कोर्ट में पेश किए हैं.

रसाना गाँव में बीबीसी हिंदी से बातचीत में बच्ची के पिता ने बताया, "वकील तो हमें कहते हैं इंसाफ मिलेगा लेकिन कब मिलेगा यह नहीं बताते. मुझे खुद नहीं पता इंसाफ मिलेगा भी की नहीं."

इस समय पीड़ित परिवार के दोनों सदस्य अकेले गाँव में रह रहे हैं. उनके दो और बच्चे अपने रिश्तेदारों के पास हैं.

उन्होंने बताया, "बड़ा बेटा कश्मीर में पढ़ रहा है और छोटा अपनी नानी के घर साम्बा में रहता है. डर की वजह से वो रसाना गाँव में नहीं रह रहे."

राज्य सरकार ने कोर्ट के आदेश पर परिवार की सुरक्षा के लिए पुलिस दल तैनात किया हुआ है. वो 24 घंटे ड्यूटी पर हाज़िर रहते हैं.

उन्होंने अपना टेंट पीड़ित परिवार के घर के सामने खड़ा कर रखा है.

'अब आपस में वो भाईचारा नहीं रहा'

पीड़िता के पिता बताते हैं इस हादसे के बाद से आस-पास के गाँव का माहौल ख़राब हो चुका है.

"अब आपस में वो भाईचारा नहीं रहा. वो बताते हैं कि हर साल सर्दियों में 10-15 डेरे इस इलाक़े में डेरा डालते थे लेकिन इस साल वो लोग यहाँ नहीं आए."

उनका कहना था कि गाँव के लोगों ने बकरवाल समुदाय के लोगों को पशुओं के लिए चारा देने से मना कर दिया.

उन्होंने बीबीसी हिंदी से कहा, "मेरी मजबूरी है कि मुझे यहाँ रहना पड़ रहा है, क्योंकि मेरा मकान यहाँ है. मुझे अपने जानवरों के लिए भी पत्ते नहीं मिल रहे. दूर जंगल में जाना पड़ता है. ख़तरा रहता है क्योंकि जंगल में जानवर होते हैं."

उन्होंने बताया रसाना और धम्याल गाँव के लोग उन्हें अच्छी नज़र से नहीं देखते. पहले एक दूसरे को मिलते थे, दुआ सलाम करते थे लेकिन अब वो सम्बन्ध भी नहीं रहा.

"गाँव के लोग कहते हैं आप लोगों ने आग लगाई, लेकिन हम कहते हैं हमने क्या आग लगानी है. आग तो उन लोगों ने लगाई है जिन्होंने हमारी बच्ची को मारा है."

अपनी मासूम बच्ची को याद करते हुए उन्होंने बताया कि सिर्फ छह महीने की थी जब उसे मैंने अपनी बहन से गोद लिया था.

उन्होंने बताया 2002 में एक हादसे में उनके दो बच्चे मारे गए थे, इस वजह से मैं बड़ा परेशान रहता था. "बाद में मैंने अपनी बहन की बच्ची को गोद ले लिया लेकिन वो भी अब नहीं रही. कभी सोचा नहीं था उस मासूम-सी बच्ची के साथ ऐसा ज़ुल्म होगा."

अपनी वकील के बारे में बात करते हुए पीड़िता के पिता ने कहा उन्होंने दीपिका सिंह राजावत को केस से इसलिए हटा दिया क्योंकि वो 110 में से सिर्फ दो बार अदालत के सामने पेश हुई थी और सिर्फ अपने बारे में सोचती थी.

"वो हमारी सुरक्षा की कम और अपनी सिक्योरिटी, गाड़ी की बात करती थी. वो कहती थी कि उसकी जान को खतरा है इसलिए हमने सोचा हम क्यों उसके लिए परेशानी खड़ी करें, इसलिए अदालत में लिख कर दे दिया कि उनको केस से अलग कर दिया जाए. "

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