नमस्ते ट्रंपः मोटेरा स्टेडियम के भव्य कार्यक्रम का ख़र्चा डोनल्ड ट्रंप नागरिक अभिनंदन समिति का?

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- Author, टीम बीबीसी गुजराती
- पदनाम, नई दिल्ली
- पढ़ने का समय: 8 मिनट
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप अहमदाबाद के मोटेरा क्रिकेट स्टेडियम में एक कार्यक्रम के दौरान लोगों को संबोधित करेंगे. उनके साथ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी होंगे.
मोटेरा स्टेडियम में यह कार्यक्रम 24 फ़रवरी की शाम को होने वाला है लेकिन फ़िलहाल चर्चा का बाज़ार इस बात को लेकर गरम है कि आयोजन में बहुत ख़र्च हो रहा है, तो भव्य कार्यक्रम का आयोजक आख़िर कौन है?
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने दिल्ली में गुरुवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि ट्रंप का अभिवादन, एक नागरिक अभिनंदन समिति कर रही है.
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इस अभिनंदन समिति का नाम डोनल्ड ट्रंप नागरिक अभिनंदन समिति बताया जा रहा है.
हालांकि द हिंदू अख़बार की एक रिपोर्ट के मुताबिक ऐसी किसी समिति के बारे में गुजरात में किसी को कोई जानकारी नहीं है.
ना ही इस आयोजन से जुड़े होर्डिंग बैनरों पर ऐसी किसी समिति का नाम देखने को मिल रहा है.
इसके बाद कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट करके प्रधानमंत्री मोदी से कई सवाल पूछे हैं.
इन सवालों में पहला सवाल है- डोनल्ड ट्रंप अभिनंदन समिति के अध्यक्ष कौन हैं? इस समिति ने ट्रंप को कब आमंत्रित किया और कब उन्होंने आमंत्रण स्वीकार किया? तब अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐसा क्यों कहा कि आपने वादा किया है कि इस भव्य आयोजन में 70 लाख लोग जमा होंगे?
सुरजेवाला ने ये भी पूछा है कि गुजरात सरकार एक निजी अज्ञात संस्था के आयोजन पर 120 करोड़ रुपये क्यों ख़र्च कर रही है.
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अब तक उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप केवल तीन घंटे के लिए ही अहमदाबाद में रहेंगे और रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस समूचे कार्यक्रम में लगभग 85 करोड़ रुपये ख़र्च होंगे.
अहमदाबाद में हर तरफ 'नमस्ते ट्रंप' के होर्डिंग नजर आ रहे हैं लेकिन इन होर्डिंग्स पर ना तो गुजरात सरकार, अहमदाबाद नगर निगम, भारतीय जनता पार्टी या फिर किसी सरकारी संस्था या फिर गैर सरकारी संगठन के नाम हैं और ना ही इनमें किन्हीं का लोगो ही है. ना ही नई समिति का कहीं कोई जिक्र है.
गुजरात सरकार की वेबसाइट https://gujaratindia.gov.in/ पर भी 'नमस्ते ट्रंप' इवेंट की तस्वीर लगी हुई है लेकिन वेबसाइट पर इसके बारे में कोई विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है.

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इस इवेंट के लिए namastepresidenttrump.in नाम से वेबसाइट भी तैयार हो गई है, जिसे गुजरात सरकार की गुजरात इंर्फोमेटिक्स लिमिटेड ने तैयार किया है. लेकिन इसमें इसमें 'अबाउट अस' के बारे में कोई जानकारी नहीं है.
गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने इस इवेंट से जुड़ा एक वीडियो ट्विटर पर पोस्ट किया है. उस वीडियो में भी आयोजक के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है.
हालांकि अहमदाबाद नगर निगम का कहना है कि दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम की ओर जाने वाली सड़क को चौड़ा करने और उसे संवारने पर सबसे अधिक ख़र्च किया गया है.
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अहमदाबाद नगर निगम आयुक्त विजय नेहरा आयोजन पर हो रहे ख़र्च को सही बताते हैं.
वो कहते हैं, "हम अहमदाबाद नगर निगम के बजट से ख़र्च कर रहे हैं. हम इन सभी सुविधाओं को स्थायी बना रहे हैं."
नेहरा कहते हैं कि इस कार्यक्रम में एक से दो लाख लोग हिस्सा लेंगे. जबकि ट्रंप ने कहा था कि अहमदाबाद के रोड शो में 70 लाख लोग हिस्सा लेंगे.
इसके साथ ही नेहरा ने न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि स्टेडियम के आसपास इन्फ्रास्ट्रक्चर बेहतर करने और आस पास कि 18 सड़कों को दुरुस्त करने में अब तक 30 करोड़ रुपये से अधिक ख़र्च किए गए हैं. नेहरा ने साथ ही बताया कि जिन सड़कों से होकर ट्रंप गुजरेंगे उन्हें संवारने पर भी 6 करोड़ रुपये ख़र्च किए गए हैं.
नेहरा कहते हैं, "इसके अलावा सौंदर्यीकरण भी किया गया है. हम न केवल अहमदाबाद बल्कि पूरी दुनिया के लिए इस आयोजन को यादगार बनाने की कोशिश कर रहे हैं. हमारे कर्मचारी ओवरटाइम काम कर रहे हैं."
लोकसभा चुनाव के ठीक बाद सितंबर, 2019 में ह्यूस्टन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'हाउडी मोदी' इवेंट हुआ था. इस इवेंट में अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप भी शामिल हुए थे.
उस इवेंट का आयोजन टेक्सास इंडिया फ़ोरम ने किया था और करीब 50 हज़ार लोग उसमें शरीक हुए थे.
आयोजक पर सवाल
ट्रंप के आयोजन की तैयारी चल रही है लेकिन इस इवेंट के आयोजक के बारे में आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं थी, लेकिन पहली बार किसी समिति का नाम सामने आया है, लेकिन उसके बारे में भी कोई ज़्यादा जानकारी सामने नहीं आई है.
इस आयोजन के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री और शीर्ष अधिकारियों के बीच लगातार बैठकें हो रही हैं. ऐसा लगता है कि राज्य सरकार इस आयोजन की मेजबानी कर रही है लेकिन कोई आधिकारिक आयोजक नजर नहीं आता.
'हाउडी मोदी' इवेंट का आयोजन टेक्सास इंडिया फोरम की ओर से किया गया था. फोरम ने अपने आधिकारिक ट्विटर एकाउंट पर उस इवेंट के आयोजक होने की जानकारी दी थी.
अहमदाबाद के कमिश्नर नेहरा ने यह बताते हैं कि एयरपोर्ट से स्टेडियम के रास्ते पर नगर निगम ने कितना पैसा ख़र्च किया है लेकिन किसी होर्डिंग पर नगर निगम का लोगो नजर नहीं आ रहा है.
वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता के मुताबिक नरेंद्र मोदी ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन अमरीका और ब्रिटेन में कर चुके हैं.
मेहता के मुताबिक इसे भव्य आयोजनों की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के जमाने में हुई थी लेकिन बाद में नरसिम्हा राव की सरकार ने ऐसे आयोजनों को बंद कर दिया था.
आलोक मेहता ये भी बताते हैं कि ऐसा ही एक आयोजन मुलायम सिंह यादव की सरकार ने तबके अमरीकी राष्ट्रपति के लिए कराया था.
इस आयोजन के बारे में पूर्व विदेश सचिव नवतेज सरना बताते हैं, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे इवेंट का आयोजन अमरीका और मैडिसन स्कावयर पर करा चुके हैं. उसी तरह का इवेंट इस बार अहमदाबाद में हो रहा है."
नए तरह की कूटनीति?
ऐसे में सवाल यही है कि क्या अमरीकी राष्ट्रपति के इवेंट के लिए इतना पैसा ख़र्च करने की कोई जरूरत है? इस सवाल के जवाब में वरिष्ठ पत्रकार राज गोस्वामी ने बीबीसी गुजराती के जिगर भट्ट को बताया, "यह आम लोगों के नजर से बड़ी रकम हो सकती है."
गोस्वामी 'नमस्ते ट्रंप' इवेंट को विदेश नीति के नए रूप में देखते हैं. वे बताते हैं, "किसी भी देश के शीर्ष नेता जब किसी दूसरे देश के आधिकारिक यात्रा पर होते हैं तो वे उस देश विशेष की संस्कृति, पर्यटन से जुड़ी जगहों के अलावा ऐतिहासिक स्मारकों को भी देखने जाते हैं."

गोस्वामी कहते हैं, "ऐसे इवेंट दुनिया भर में आयोजित होते हैं. प्रत्येक देश इस तरह के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों पर पैसा ख़र्च करता है."
वहीं वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता के मुताबिक इस तरह के सांस्कृतिक इवेंट के आयोजनों से देशों के बीच आपसी रिश्ते बेहतर होते हैं.
मेहता कहते हैं, "जब आप किसी दूसरे देश के राष्ट्रपति को अपने देश की संस्कृति से जोड़ते हैं तो निश्चित तौर पर उनका प्यार और सम्मान हासिल करते हैं. तो इस आयोजन से भारतीयों को, उनके देश को और देश की राजनीतिक मामलों को फ़ायदा होगा."
मेहता के मुताबिक ट्रंप की इस यात्रा से भारत को ना केवल राजनीतिक लाभ होगा, बल्कि आर्थिक लाभ भी होगा.
कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने हाउडी मोदी को दुनिया सबसे महंगा आयोजन बताते हुए कहा ता कि ऐसा कोई भी इवेंट भारत की आर्थिक स्थिति छुपा नहीं सकता है.
आर्थिक अख़बार इकॉनामिक टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी ने कहा था कि 'हाउडी मोदी' इवेंट का आयोजन अमरीका स्थिति स्वयंसेवकों ने किया था और इस आयोजन में भारत सरकार और बीजेपी की कोई भूमिका नहीं थी.
वहीं वरिष्ठ पत्रकार रमेश ओझा ने बीबीसी गुजराती के जिगर भट्ट को बताया है कि ऐसे आयोजन पैसों की बर्बादी भर हैं. वे कहते हैं, "नरेंद्र मोदी ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उन्हें इसकी आदत है. उनमें ऐसे आयोजनों की प्रति एक चाहत है."
अर्थशास्त्री इंदिरा हिरवे कहती हैं, "जब देश की आर्थिक स्थिति इतनी ख़राब हो तो हम इतना ख़र्च नहीं उठा सकते."
ये लोग झुग्गी झोपड़ियों को ढकने के लिए बनाए गए दीवार को बाद में गिराने की बात की ओर भी इशारा करते हैं.
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अर्थशास्त्री हेमंत कुमार शाह बीबीसी गुजराती के जिगर भट्ट से बात करते हुए कहते हैं, "अगर पैसा स्थायी संपत्ति, मसलन रोड, फुटपाथ, पुल बनाने के लिए ख़र्च होता तो बात दूसरी थी क्योंकि वे हमेशा इस्तेमाल किए जाते."
हेमंत कुमार शाह ऐसे भीड़भाड़ वाले आयोजनों पर होने वाले ख़र्च के चलते इसे बंद करने की बात करते हैं. वे कहते हैं, "ऐसे आयोजनों को जगमग बनाया जाता है लेकिन वे स्थायी तौर पर उपयोगी नहीं होते हैं. इससे लोगों को नौकरियां नहीं मिलतीं."
सरकार को ख़र्च का हिसाब देना चाहिए
गुजरात कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष दोषी के मुताबिक 'नमस्ते ट्रंप' इवेंट पर खर्च हो रहा पैसा, संसाधनों की बर्बादी है.
उन्होंने बीबीसी गुजराती से कहा, "मैं डोनल्ड ट्रंप के दौरे का स्वागत करता हूं. लेकिन गुजरात बेरोजगारी, स्वास्थ्य समस्याएं, किसानों की समस्याएं और कुपोषण का सामना कर रहा है. ऐसे में इन आयोजनों पर पैसा ख़र्च करने के बदले लोगों की समस्याओं को दूर करने की कोशिश होनी चाहिए."
मनीष दोषी के मुताबिक, "दो देशों के राष्ट्र प्रमुखों की मुलाकात ही बड़ी इवेंट होती है, उसे अलग से ग्लैमराइज करने की जरूरत नहीं होती."
गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता शंकर सिंह वाघेला भी इस आयोजन की आलोचना कर रहे हैं.
शंकर सिंह वाघेला ने बीबीसी गुजराती से कहा, "मैं राज्य और केंद्र सरकार से अपील करता हूं कि वे राष्ट्रपति ट्रंप के दौरे में हुए ख़र्च का विवरण सार्वजनिक करें."
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वाघेला प्रधानमंत्री मोदी से ये सवाल भी पूछते हैं, "क्या आपने ट्रंप को मार्केटिंग के लिए बुलाया है? ट्रंप को यहां बुलाने की कोई वजह है? मैं यह भी नहीं समझ पा रहा हूं कि अप क्यों ट्रंप के प्रचारक के तौर दिखना चाहते हैं?"
वाघेला कहते हैं, "ऐसे आयोजनों पर आपको टैक्स देने वाली जनता के पैसों को ख़र्च करने का कोई अधिकार नहीं है. अगर आप लोगों के सच्चे सेवक हैं तो ख़र्चे का हिसाब दीजिए."
इस इवेंट की भव्यता पर सवालिया निशाने उठाते हुए शंकर सिंह वाघेला कहते हैं, "यह गांधी, सरदार और लाल बहादूर शास्त्री की सादगी का मजाक़ उड़ाने जैसा है."
जब ट्रंप अहमदबाद का दौरा कर रहे हैं, उसी वक्त नर्मदा ज़िले के केवडिया इलाके के 14 गांवों में लोग धरना प्रदर्शन पर बैठे हैं. ये आदिवासी समुदाय के लोग चाहते हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप उनकी समस्याओं के निदान के लिए मध्यस्थता करें.
'नमस्ते ट्रंप'
अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अहमदाबाद को सजाया गया है. ट्रंप अहमदाबाद में महज तीन घंटे रूकेंगे. इसके लिए शहर के सड़कों की साफ़ सफ़ाई हो चुकी है.
गुजरात सरकार के अधिकारियों ने समाचार एजेंसी रायटर्स को बताया है कि ट्रंप अहमदाबाद में तीन घंटे के लिए ठहरेंगे और इस यात्रा के आयोजन के लिए करीब 85 करोड़ रुपये ख़र्च हो रहे हैं.

ट्रंप की सुरक्षा के लिए 12,000 पुलिस अधिकारियों को तैनात किया जा रहा है, इसमें 85 करोड़ का करीब आधा पैसा ख़र्च हो रहा है.
अहमदाबाद सिटी के डीसीपी विजय पटेल के मुताबिक, "25 आईपीएस, 65 अस्सिटेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस, 200 पुलिस इंस्पेक्टर, 800 सब इंस्पेक्टर और 10,000 पुलिसकर्मियों को अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप की यात्रा के दौरान ड्यूटी पर तैनात होंगे."
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप की यात्रा के दौरान सजावट के लिए इस्तेमाल 3.5 करोड़ रूपये के फूल इस्तेमाल होंगे.
अमरीका के राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप की यह पहली भारत यात्रा है. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वे अहमदाबाद के गांधी आश्रम जाएंगे या नहीं जाएंगे.
वैसे शिवसेना के मुख्यपत्र सामना में प्रकाशित एक लेख में गुजरात मॉडल की कटु आलोचना की गई है.
सामना के मुताबिक ट्रंप से गरीबी को छुपाने के लिए करीब एक अरब रूपये ख़र्च हुए हैं.
ट्रंप अहमदाबाद हवाई मार्ग से आएंगे. इसके बाद करीब 22 किलोमीटर लंबे रोड शो के दौरान नरेंद्र मोदी और ट्रंप एक साथ होंगे. इस रोड शो और मोटेरा स्टेडियम के आयोजन में लाखों लोगों के शरीक होने का अनुमान लगाया जा रहा है.
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