मंगलसूत्र या करवाचौथ के विज्ञापन- मार्केटिंग के लिए महिलाओं का इस्तेमाल तो नहीं?

सब्यसाची

इमेज स्रोत, SOCIAL MEDIA

इमेज कैप्शन, सब्यसाची ने अब इस विज्ञापन को वापस ले लिया है.
    • Author, दिव्या आर्य
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • पढ़ने का समय: 4 मिनट

प्रगतिशील औरतों के नाम पर बनाए गए और औरतों की पारंपरिक छवि को बचाने के लिए हटाए गए, दो विज्ञापनों की कहानी में दरअसल औरतों का हित कहां है?

पिछले कुछ दिनों में दो कंपनियां आलोचना के बाद अपने विज्ञापन वापस ले चुकी हैं.

फैशन ब्रैंड सब्यसाची का 'मंगलसूत्र' का विज्ञापन जिसमें अंतरंग लम्हों में औरतों को अपने साथी के साथ दिखाया गया. और करवाचौथ के आसपास 'ब्लीच क्रीम' का डाबर का विज्ञापन जिसमें पति और पत्नी के बजाय दो औरतों को एक दूसरे के लिए व्रत रखते और चांद निकलने पर उसे साथ तोड़ते हुए दिखाया गया.

एक तबके ने इन विज्ञापनों को हिंदू आस्था और परंपराओं पर हमला बताया तो दूसरी ओर 'मंगलसूत्र' के विज्ञापन में शादीशुदा औरत के अपनी 'सेक्सुआलिटी' को बेझिझक सामने लाने के लिए, और करवाचौथ के विज्ञापन में समलैंगिक रिश्तों को दर्शाने के लिए सराहा गया.

दोनों विज्ञापन पारंपरीक रीत को नए तरीके से पेश करते हैं. सब्यसाची ने अपने बयान में विज्ञापन बनाने के पीछे 'सशक्तिकरण' की भावना का ज़िक्र भी किया.

पर कई औरतें इससे इत्तफाक नहीं रखतीं. वो मंगलसूत्र पहनने, मांग में सिंदूर लगाने और करवाचौथ का व्रत रखने जैसी परंपराओं को मानना पसंद नहीं करतीं क्योंकि उनके मुताबिक ये शादी में औरतों के गैर-बराबरी के दर्जे को बनाए रखने में योगदान देती हैं.

मर्दों को शादीशुदा होने के कोई सूचक आभूषण नहीं पहनने होते और ना ही उनसे पत्नी की लंबी आयु के लिए व्रत रखने की उम्मीद की जाती है. उन्हें शादी के बाद अपना नाम या सरनेम भी नहीं बदलना पड़ता, ना ही उन्हें अपना परिवार छोड़ पत्नी के घर में रहने की परंपरा निभानी होती है.

औरतों पर मर्दों का हक

मंगलसूत्र पहनना या करवाचौथ का व्रत रखना अपनेआप में कोई बड़ी बात नहीं लगती लेकिन इसके मायने गहरे हैं.

डाबर के विज्ञापन में समलैंगिक रिश्ता तो दिखाया गया पर उसे करवाचौथ का व्रत रखने के संदर्भ में रखा गया.

लेखक और फिल्मकार पारोमिता वोहरा ने इसे 'पिंक-वॉशिंग' यानी समलैंगिकता के नाम पर की जानेवाली मार्केटिंग कहा.

डाबर

इमेज स्रोत, VIDEO STILL

इमेज कैप्शन, डाबर के उत्पाद फ़ेम ब्लीच का विज्ञापन

अपने लेख में उन्होंने कहा कि शादी के साथ जुड़े उत्तराधिकार, जाति और बराबरी के मुद्दों पर काम करने की जगह, समाज नए-नए रिश्तों को शादी के तहत लाता रहता है.

भारत में समलैंगिक रिश्ते गैर-कानूनी नहीं हैं पर समलैंगिकों की शादी को अभी कानूनी मान्यता नहीं मिली है.

ग्रामीण और पिछड़े समुदायों के साथ काम करने और उनके अनुभव लिखने में उनकी मदद करनेवालीं लेखक मधुरा चक्रवर्ती मानती हैं कि इन परंपराओं की वजह से गैर-बराबरी को सही मान लिया जाता है और उसपर सवाल नहीं उठाए जाते.

वो लिखती हैं कि मंगलसूत्र और सिंदूर जैसे सूचक इस बात की तस्दीक करते हैं कि शादीशुदा औरत पर उनके पति का मालिकाना हक है. सामाजिक परंपराओं में पत्नी के हक के कोई सूचक नहीं हैं.

सब्यासाची

इमेज स्रोत, SOCIAL MEDIA/SABYASACHI

इमेज कैप्शन, विवाद के बाद सब्यसाची ने विज्ञापन वापस लिया.

मंगलसूत्र या गले की बेड़ी

इससे पहले सितंबर में ज़ेवरात की एक अंतरराष्ट्रीय लग्ज़री ब्रैंड, बलगारी, ने भी भारत में 'मंगलसूत्र' के साथ अपना काम शुरू किया.

अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने उनका डिज़ाइन किया हुआ मंगलसूत्र लॉन्च करने के लिए जब प्रेस वार्ता की तो ये बार-बार जताया कि ये 'मॉडर्न और आज़ाद' औरत के लिए है.

फैशन हिस्टॉरियन ज़ारा आफ़ताब ने तब इसे 'मार्केटिंग गिमिक' की संज्ञा दी.

उनके मुताबिक, "ये विचलित करनेवाली बात है कि जब हम एक समाज के तौर पर पत्नी और मां की रूढ़ीवादी छवि को पीछे छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, ये इटैलियन ब्रैंड भारत की मॉडर्न औरतों के बारे में ऐसी धारणा को ही आगे ले जा रही है."

छोड़िए Instagram पोस्ट
Instagram सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Instagram से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Instagram cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट Instagram समाप्त

पिछले साल, गोवा के एक कॉलेज में पोलिटिकल साइंस की एक प्रोफेसर के फेसबुक पर की गई पोस्ट में मंगलसूत्र की तुलना कुत्ते के गले में बंधी बेड़ी से करने पर उनके खिलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कर दी गई थी.

पितृसत्ता और रूढ़िवाद के संदर्भ में की गई इस पोस्ट के लिए सफाई देते हुए उन्होंने कहा था कि वो बचपन से ही ये समझने की कोशिश करती रही हैं कि अलग-अलग परंपराओं में शादीशुदा औरतों के लिए खास सूचक क्यों हैं और मर्दों के लिए क्यों नहीं?

'प्रगतिशील विचारों के लेन-देन' के मक़सद से की गई उस पोस्ट पर राष्ट्रीय हिंदू युवा वाहिनी की शिकायत के बाद प्रोफेसर ने माफी मांगी.

सब्यसाची

इमेज स्रोत, sabyasachiofficial

इमेज कैप्शन, सब्यसाची के मंगलसूत्र का नया विज्ञापन

नया संदेश, पुराना ढांचा

जैसा कि सब्यसाची और डाबर ने भी किया. जब उनके विज्ञापनों पर हिंदू आस्था को ठेस पहुंचाने के आरोप लगे. मंगलसूत्र वाले विज्ञापन को अश्लील भी बताया गया.

औरतों के शरीर के सेक्सुअल चित्रण को हर तरह के सामान बेचने के लिए सैंकड़ों बार इस्तेमाल किया गया है. साल 2017 में ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल, अमेज़न ने ऐसी ऐश-ट्रे निकाली जिसमें एक नग्न महिला को टांगें फैलाए बाथ-टब में लेटे हुए दिखाया गया.

सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना के बाद अमेज़न ने ऐशट्रे को अपनी वेबसाइट से हटा दिया.

हालांकि सब्यसाची के मुताबिक उनका विज्ञापन औरतों के सशक्तीकरण के बारे में था.

डाबर वाला विज्ञापन ब्लीच क्रीम के लिए था जो सुंदरता के एक खास मानक को बढ़ावा देती है. लेकिन उसे भी समलैंगिक रिश्तों के संदेश में प्रगतिशील जामा पहनाया गया.

औरतों के नज़रिए से तो नहीं, पर धर्म के आहत होने के दावे पर आलोचना बहुत हुई और उनमें शामिल सबसे मुखर आवाज़ एक राज्य के गृह मंत्री की थी जिन्होंने कंपनियों को कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी. आखिर दोनों कंपनियों ने अपने विज्ञापन वापस ले लिए.

वीडियो कैप्शन, ऑटिस्टिक बच्चों के लिए दुनिया आसान बनाने की कोशिश करती एक मां

गोवा के मामले के बाद लेखक और ऐक्टिविस्ट राम पुनियानी ने रेखांकित किया कि औरतों पर नियंत्रण दिखानेवाले ये सूचक भारत की परंपराओं का हिस्सा हैं और सभी धार्मिक गुट इन्हें बहुत अहमियत देते हैं.

एक लेख में उन्होंने कहा कि इस वक्त दुनियाभर में धार्मिक राष्ट्रवाद लोकप्रिय हो रहा है और ऐसी रीत को और प्राथमिकता और सामाजिक स्वीकृति दी जा रही है.

ऐसे में कंपनियों के विज्ञापन लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए नए दिखनेवाले संदेशों को शादी के पारंपरिक और स्वीकृत ढांचे में सीमित रखकर परोस रहे हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)