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उज्ज्वला योजना: 90 लाख लाभार्थियों ने दोबारा सिलिंडर नहीं भरवाया- प्रेस रिव्यू
नरेंद्र मोदी सरकार की प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं में से एक प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के 90 लाख लाभार्थियों ने बीते वित्त वर्ष में कभी दोबारा सिलिंडर भरवाया ही नहीं.
अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदू' अपनी एक विशेष रिपोर्ट में लिखता है कि बीते वित्त वर्ष में एक करोड़ लाभार्थियों ने अपने सिलिंडर सिर्फ़ एक बार ही भरवाए थे.
अख़बार लिखता है कि आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने तीन तेल मार्केटिंग कंपनियों इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड से आरटीआई के ज़रिए यह जानकारी हासिल की है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक मई 2016 को उत्तर प्रदेश के बलिया में इस योजना की शुरुआत की थी जिसका उद्देश्य मार्च 2020 तक 8 करोड़ परिवारों को गैस कनेक्शन देना था. अभी तक प्रधानमंत्री उज्जवला योजना (PMYU) के तहत 9 करोड़ कनेक्शन दिए जा चुके हैं.
2021-22 वित्त वर्ष में PMUY 2.0 लॉन्च की गई थी और इसके तहत एक करोड़ अतिरिक्त कनेक्शन दिए जाने का प्रावधान किया गया था.
सूचना के अधिकार (आरटीआई) के ज़रिए मिले जवाब में इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन ने कहा है कि मार्च 2021 तक उन्होंने जो भी कनेक्शन दिए थे, उनमें से बीते वित्त वर्ष में 65 लाख उपभोक्ताओं ने अपने सिलिंडर वापस नहीं भरवाए. वहीं हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के 9.1 लाख और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के 15.96 लाख उपभोक्ताओं ने अपने सिलिंडर नहीं भरवाए.
भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने साफ़ किया है कि यह 15.96 लाख वो उपभोक्ता हैं जिनको सितंबर 2019 तक कनेक्शन दिए गए थे जो कि उज्जवला योजना का पहला चरण था.
ऐसे उपभोक्ता जिन्होंने सिलिंडर सिर्फ़ एक बार भरवाया है, उनमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के 52 लाख, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के 27.58 लाख और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के 28.56 लाख उपभोक्ता शामिल हैं.
इस साल मार्च में मोदी सरकार ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया था कि उज्जवला योजना के तहत सालाना 3.66 एलपीजी सिलिंडर ही वापस भरवाए जा रहे हैं.
यहाँ इस आंकड़े पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है कि कोरोना वायरस महामारी के दौरान केंद्र सरकार ने इस योजना के तहत एक अप्रैल 2020 से लेकर 31 दिसंबर 2020 तक तीन बार फ़्री सिलिंडर भी दिए थे.
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया था कि PMUY के 14.17 करोड़ लाभार्थियों ने फ़्री सिलेंडर भरवाए थे.
ज्ञानवापी मस्जिद: जज बोले- परिवार सुरक्षा को लेकर चिंतित
वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे को लेकर फ़ैसला देने वाले जज ने कहा है कि उनका परिवार उनकी सुरक्षा के लिए 'हमेशा चिंतित' रहता है.
अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदुस्तान टाइम्स' लिखता है कि तीन दिन तक लगातार चली सुनवाई के बाद सिविल जज रवि कुमार दिवाकर ने 17 मई तक मस्जिद का सर्वे पूरा करने का फ़ैसला सुनाया था.
सिविल जज दिवाकर ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा था कि 'एक सिविल मामले को एक असाधारण मामला बनाकर डर का माहौल पैदा किया जा रहा है.'
अख़बार समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से लिखता है, "बहुत डर है, इस वजह से मेरा परिवार मेरी सुरक्षा के लिए चिंतित रहता है और मैं उनकी सुरक्षा के लिए चिंतित हूं. जब भी मैं घर से बाहर जाता हूं तो मेरी पत्नी लगातार सुरक्षा को लेकर चिंतित रहती हैं."
इस सप्ताह अदालत मस्जिद के अंदर वीडियोग्राफ़ी किए जाने को लेकर आपत्ति को सुन रही थी. मस्जिद प्रबंधन कमिटी ने सर्वे कर रहे अधिकारी अजय कुमार मिश्रा के कथित भेदभावपूर्ण व्यवहार को लेकर भी आपत्ति जताई थी.
कांग्रेस का तीन दिवसीय चिंतन शिविर
कांग्रेस पार्टी का आज से उदयपुर में चिंतन शिविर शुरू होने जा रहा है.
दैनिक जागरण अख़बार लिखता है कि 13 से 15 मई तक होने जा रहे इस चिंतन शिविर में कांग्रेस अपनी संगठनात्मक कमज़ोरियों पर आत्ममंथन और 2024 के आम लोकसभा चुनाव के लिए दशा-दिशा तय करेगी.
अख़बार लिखता है कि कांग्रेस पार्टी इसके साथ ही भाजपा-आरएसएस के कथित ध्रुवीकरण चुनावी मॉडल के ख़िलाफ़ स्पष्ट राजनीतिक लड़ाई की घोषणा भी करेगी.
वहीं पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी के राजनीतिक चिंतन में शामिल होने के लिए कार्यसमिति के कुछ सदस्यों के साथ ट्रेन से उदयपुर रवाना हुए हैं.
चिंतन शिविर को बेहद अहम क़रार देते हुए पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सुरजेवाला ने कांग्रेस की चुनावी पराजयों के बाद सामने आ रही चुनौतियों की बात स्वीकार की है. साथ ही कहा है कि कि देश की वर्तमान चुनौतियों का समाधान निकालने के लिए कांग्रेस को अपनी कमज़ोरियों से उबरना होगा.
सुरजेवाला का कहना है कि देश की अपेक्षाओं के अनुरूप कांग्रेस को अपनी संगठनात्मक क्षमता, दक्षता, कार्यकुशलता और कार्यशैली का न सिर्फ मूल्यांकन करना होगा बल्कि वर्तमान चुनौतियों और परिस्थितियों के अनुरूप ढालना भी होगा.
यूपी: कॉन्ट्रैक्ट पर रखे गए कर्मचारियों के पीएफ़ में करोड़ों का घपला
हिंदी अख़बार अमर उजाला ने अपनी एक विशेष रिपोर्ट में बताया है कि उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के कॉन्ट्रैक्ट पर रखे गए कर्मचारियों के भविष्य निधि (पीएफ़) में करोड़ों रुपये का घालमेल हुआ है.
अख़बार लिखता है कि आउटसोर्सिंग एजेंसियों ने कर्मचारियों की सैलरी से पीएफ़ की कटौती की, लेकिन उस रकम को खाते में जमा नहीं किया. लखनऊ सहित 25 ज़िलों में यह मामला सामने आ चुका है.
राज्य के स्वास्थ्य महानिदेशक डॉक्टर वेदब्रत सिंह ने सभी सीएमओ और सीएमएस को मामले की पड़ताल करने का निर्देश दिया है.
स्वास्थ्य विभाग में कोविड-19 और अन्य कार्यक्रमों के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसियों के ज़रिए कर्मचारियों की तैनाती की गई है. इन एजेंसियों का चयन ज़िला स्वास्थ्य समिति करती है, जिसके अध्यक्ष संबंधित ज़िलों के ज़िलाधिकारी हैं. प्रदेश भर में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की संख्या 15 हज़ार से अधिक है.
इनकी सैलरी से पीएफ़ कटौती होती है पर आउटसोर्सिंग एजेंसियों ने मानदेय भुगतान करते वक्त कर्मचारी के हिस्से की पीएफ रकम की कटौती तो कर ली, लेकिन उसे खाते में जमा नहीं किया.
लखनऊ में इस तरह का मामला सामने आया तो कर्मचारियों में खलबली मच गई. अब हर ज़िले में इस तरह का मामला सामने आ रहा है.
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