दिनाकरन पर महाभियोग चलाने का रास्ता साफ़

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सुप्रीम कोर्ट ने सिक्किम के मुख्य न्यायधीश जस्टिस पीडी दिनाकरन की उस याचिका को ख़ारिज कर दिया है, जिसमें उनके कथित भ्रष्टाचार और ग़लत आचरण के लिए बनाई गई एक समिति की जाँच पर रोक लगाने की मांग की गई थी.
ये तीन सदस्यीय समिति राज्यसभा के सभापति और उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने तैयार कराई थी. यह दिनाकरन के ख़िलाफ़ महाभियोग चलाने की तरफ़ एक क़दम था.
सिक्किम के मुख्य न्यायधीश ने अपनी अपील में समिति के एक सदस्य पीपी राव पर पक्षपातपूर्ण होने का आरोप लगाया था. उनका कहना था कि समिति अपने कार्यक्षेत्र से बाहर जा रही है.
लेकिन देश की उच्चतम न्यायालय ने उनकी अपील ख़ारिज कर दी और याचिका पर ही सवाल उठाते हुए उनकी कड़ी निंदा की.
समिति
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लगता है कि न्यायधीश दिनाकरन की याचिका अपने ख़िलाफ़ महाभियोग की प्रक्रिया को देर करने का एक तरीक़ा है.
अदालत ने राज्य सभा के सभापति को निर्देश दिया है कि वो समिति में पीपी राव की जगह दूसरे सदस्य की नियुक्ति करें.
संसद में जस्टिस दिनाकरन के ख़िलाफ़ 12 मामले तय किए जाने के बाद हामिद अंसारी ने इन आरोपों की जाँच के लिए जनवरी 2010 में सुप्रीम कोर्ट जज आफ़ताब आलम, कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश जेएस शेखर और वरिष्ठ वकील पीपी राव की एक समिति बनाई थी.
जस्टिस दिनाकरन के ख़िलाफ़ ज़मीन हथियाने, अघोषित संपत्ति और फ़ायदे के लिए फैसला देने का आरोप है. इसी कारण से उन्हें सुप्रीम कोर्ट जज के तौर पर उनकी नियुक्ति रूक गई थी.












