'मध्यप्रदेश गान' अनिवार्य करने पर विवाद

शिवराज सिंह चौहान
इमेज कैप्शन, शिवराज सिंह सरकार ने स्कूलों में गीता पढ़ाए जाने की भी घोषणा की है

मध्यप्रदेश के गान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है.

राज्य के राजनीतिक दल और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने 'मध्यप्रदेश गान' के गाने को अनिवार्य बनाए जाने के फ़ैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब राष्ट्रीय गान और राष्ट्र गीत गाए जाते हैं तो फिर अलग से मध्यप्रदेश गान की क्या ज़रुरत है.

उनका कहना है कि इससे क्षेत्रीयतावाद बढ़ेगा और राष्ट्रगान का महत्व कम होगा.

जबकि सरकार का कहना है कि 'मध्यप्रदेश गान' राज्य की संस्कृति के बारे में इसलिए इसे गाने पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए.

<link type="page"><caption> क्या है इस मध्यप्रदेश गान में?</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2011/07/110727_madhyapradesh_anthem_vv.shtml" platform="highweb"/></link>

राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने गत आठ जुलाई को एक अध्यादेश जारी करके सभी शासकीय आयोजनों और स्कूल-कॉलेजों में 'मध्यप्रदेश गान'को गाना अनिवार्य कर दिया था.

राज्य सरकार ने अपने सभी जनसंपर्क अधिकारियों के 'मध्यप्रदेश गान' को मोबाइल का कॉलर ट्यून बना दिया है.

इसके बाद सभी जनसंपर्क अधिकारियों के सरकारी फ़ोन पर आप फ़ोन करें तो 'मध्यप्रदेश गान' सुनाई देगा.

आपत्ति

'मध्यप्रदेश गान' को अनिवार्य करने का अध्यादेश राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किया है.

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय गीत गए ही जाते हैं तो फिर अलग से 'मध्यप्रदेश गान' गाने का क्या मतलब है.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमोद प्रधान का कहना है कि इस तरह के क़दम से क्षेत्रवाद को बढ़ावा मिलेगा.

प्रधान का कहना है,"भारतीय जनता पार्टी की जो राजनीति है और जो उनकी संघ पोषक विचारधारा है उसके तहत वह इस तरीके के पृथकतावादी या क्षेत्रीयतावादी शगूफ़े वह छोड़ते रहते हैं. संघ परिवार तो राष्ट्रीय गान को एक तरह से नकारता है."

दूसरी ओर हार्मनी फाउंडेशन फादर आनंद मुत्तुंगल ने भी राज्य सरकार के इस फ़ैसले पर आपत्ति कर रहे हैं.

उनका कहन है, "जब मध्य प्रदेश की सरकार ने राज्य गान को गाना अनिवार्य किया था तो उसका उद्देश्य लोगों के बीच मध्य प्रदेश के विकास के लिए लोगों के बीच जाग्रति फैलाना था. लेकिन इसमें एक समस्या यह है कि इससे क्षेत्रीयतावाद बढ़ सकता है."

उनका कहना है, "मध्यप्रदेश में भारत के लगभग सभी प्रदेशों में लोग आकर बसे हैं. हमें सिर्फ़ एक जगह की बात नहीं करनी चाहिए बल्कि संपूर्ण भारत की बात करनी चाहिए."

'गौरवशाली इतिहास का बखान'

मध्य प्रदेश की सरकार का कहना है कि राज्य के गान को शासकीय कार्यक्रमों में गाया जाना बिलकुल ग़लत नहीं है.

सरकार का कहना है कि 'मध्यप्रदेश गान' में राज्य की संस्कृति की बात कही गई है.

मध्य प्रदेश सरकार में सामान्य प्रशासन विभाग के राज्य मंत्री कन्हैया लाल अग्रवाल ने बीबीसी से कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चाहते हैं कि शासकीय कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गान के बाद 'मध्यप्रदेश गान' भी गाया जाए. अग्रवाल पूछते हैं, "आपने सुना है क्या मध्य प्रदेश गान? इसमें कोई क्षेत्रीयतावादी बात नहीं है. इसमें सिर्फ मध्य प्रदेश के गौरवशाली इतिहास का बखान किया गया है." इस आरोप पर कि 'मध्यप्रदेश गान' को गाना अनिवार्य करके राष्ट्र गान के महत्व को कम करने की कोशिश की जा रही है, राज्य मंत्री अग्रवाल कहते हैं कि यह कहना ग़लत होगा कि 'मध्यप्रदेश गान' को अनिवार्य करने से राष्ट्रीय गान या राष्ट्रीय गीत को हल्का करने की कवायद की जा रही है.

वह कहते हैं, "न कोई राष्ट्रीय गान को हल्का कर सकता है ना राष्ट्रीय गीत को. वह अपनी जगह है. अलबत्ता मध्य प्रदेश गान लागू करके हम लोगों के बीच मध्य प्रदेश के प्रति प्रेम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं."

विवादित फ़ैसले

मध्यप्रदेश गान को अनिवार्य करना राज्य की भाजपा सरकार का पहला फ़ैसला नहीं है जिस पर विवाद हुआ है.

इससे पहले मध्यप्रदेश सरकार ने स्कूलों में को 'सूर्य नमस्कार' के अनिवार्य कर दिया था और उस पर भी विवाद हुआ था और कहा गया था कि स्कूलों में विभिन्न धर्मों के बच्चे पढ़ते हैं और ऐसे में सूर्य नमस्कार को अनिवार्य नहीं करना चाहिए.

हालांकि अधिकारियों का कहना है कि ये आदेश विवेकानंद जयंती यानी 12 जनवरी के लिए ही था लेकिन फ़िलहाल इस आदेश पर अमल शुरु नहीं हो पाया है.

कर्नाटक में पाठ्यक्रम में गीता को शामिल करने के भाजपा सरकार के फ़ैसले पर अभी विवाद चल ही रहा है इस बीच मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी कहा है कि मध्यप्रदेश के स्कूलों में गीता पढ़ाई जाएगी.

हालांकि इस पर मंत्रिमंडल को औपचारिक फ़ैसला लेना है.