'भारतीय राष्ट्रगान ग़लत ढंग से गाया जाता है'

मुंबई में एक प्रोफ़ेसर ने कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि भारतीय राष्ट्रगान में 'सिंध' शब्द की जगह 'सिंधु' लिखा जाना चाहिए क्योंकि सिंध पाकिस्तान का हिस्सा है.
प्रोफ़ेसर श्रीकांत मलुश्ते ने बीबीसी को बताया कि चूंकि सिंधु भारतीय नदी का नाम है, इसलिए राष्ट्रगान में ‘सिंध’ की जगह ‘सिंधु’ लिखा जाना चाहिए.
उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि सरकार ने इस सुझाव को हालांकि 1950 में स्वीकृति दे दी थी, लेकिन प्रशासन ने इस बाबत जागरुकता पैदा करने के लिए कुछ नहीं किया जिसकी वजह से ज़्यादातर प्रसिद्ध गायक भी राष्ट्रगान को ग़लत ढंग से गाते आ रहे हैं.
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, “जब संविधान सभा ने 24 जनवरी, 1950 के दिन राष्ट्रगान को अपनाया था, तब रबींद्रनाथ टेगोर के लिखे इस गान में सिंध शब्द की जगह सिंधु लिखा गया था. ऐसा इसलिए किया गया था क्योंकि भारत-पाक विभाजन के बाद सिंध प्रांत पाकिस्तान के हिस्से में आया था.”
प्रोफ़ेसर मलुश्ते का कहना था कि आज भी राष्ट्रगान का ग़लत उच्चारण किया जाता है.
“भारत में राष्ट्रगान को दो अलग-अलग तरीकों से गाया जाता है. हालांकि कुछ लोग सिंधु शब्द का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन ज़्यादातर लोग सिंध शब्द का ही प्रयोग करते हैं, जो कि ग़लत है.”
उन्होंने उन कलाकारों की एक सूचि भी बनाई है जो राष्ट्रगान को ‘सही’ ढंग से गाते हैं.
प्रोफ़ेसर मलुश्ते अब चाहते हैं कि अदालत इस बाबत सरकार को एक आदेश भेजे ताकि राष्ट्रगान में लिखी गई ‘गलती’ को सुधारा जा सके.
इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को अदालत में होगी.












