मान गए अन्ना, रामलीला मैदान में होगा अनशन

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अन्ना हज़ारे तिहाड़ जेल से निकल कर रामलीला मैदान में 15 दिनों के अनशन के लिए राज़ी हो गए हैं. वो गुरुवार दोपहर तीन बजे के बाद रामलीला मैदान पहुंचेंगे.
अन्ना हज़ारे की सहयोगी किरन बेदी ने ट्विटर पर अपने संदेश के ज़रिए तड़के ढाई बजे यह जानकारी दी.
किरन बेदी के ट्विट में कहा गया है, ‘‘ दिल्ली पुलिस ने अपनी वो शर्तें हटा ली हैं जो हमें स्वीकार्य नहीं थी और हमें 15 दिनों का समय दिया है. अन्ना को यह मंज़ूर है. अन्ना दोपहर तीन बजे के बाद रामलीला मैदान में होंगे.’’
किरन बेदी ने बाद में संवाददाताओं को भी जानकारी दी और बताया कि अन्ना की टीम ने तीन हफ्ते का समय मांगा था लेकिन दिल्ली पुलिस ने 15 दिन का समय दिया जिस पर वो राज़ी हो गए.
अन्ना की टीम और दिल्ली पुलिस के बीच अनशन की अवधि को लेकर सहमति नहीं बन रही थी और सरकार पर अन्ना को अनशन की अनुमति देने के लिए भीषण दबाव था.
देर रात साढ़े बारह बजे अन्ना की टीम के सदस्यों की एक बैठक दिल्ली पुलिस के आयुक्त बीके गुप्ता के साथ उनके घर पर हुई थी और इसी बैठक में सहमति बनी.
पुलिस आयुक्त के साथ बैठक में अन्ना की टीम से किरन बेदी, प्रशांत भूषण, मनीष सिसौदिया और अरविंद केज़रीवाल थे.
बुधवार का घटनाक्रम
इससे पहले बुधवार को सरकार के लोकपाल विधेयक का विरोध कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे के समर्थकों ने इंडिया गेट से जंतर-मंतर तक जुलूस निकाला है.
हज़ारे को रिहा करने के आदेश मंगलवार रात ही जारी कर दिए गए थे मगर उसके बाद भी उन्होंने ये कहते हुए जेल से बाहर आने से मना कर दिया कि जब तक अनशन पर लगी शर्तें नहीं हटतीं वह जेल से बाहर ही नहीं आएँगे.
इस बीच हज़ारों लोग तिरंगा लेकर बुधवार शाम चार बजे इंडिया गेट पहुँचे और वहाँ से उन्होंने जंतर-मंतर की ओर मार्च शुरू किया.
लोगों का हुजूम वहाँ उमड़ा जिसे देखकर प्रशासन को चिंता होना स्वाभाविक था मगर इस विरोध प्रदर्शन की अब तक की परंपरा को बरक़रार रखते हुए जुलूस क़ानून-व्यवस्था के दायरे में ही रहा. लोग नारेबाज़ी करते रहे और उत्साह से आगे बढ़ते रहे.
उधर हज़ारों की संख्या में अन्ना हज़ारे के समर्थक बुधवार की रात भी तिहाड़ जेल के बाहर इस इंतज़ार में मौजूद हैं कि उनके निकलने पर वे उनका स्वागत करेंगे.

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संसद में बहस
दूसरी ओर बुधवार को भी संसद में विपक्षी पार्टियों ने हज़ारे को अनशन न करने देने के सरकार के फ़ैसले पर सवाल उठाए.
मगर प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने संसद में दिए बयान में हज़ारे की गिरफ़्तारी का बचाव किया.
प्रधानमंत्री ने अपने बयान में कहा है कि अन्ना हज़ारे ने दिल्ली पुलिस की शर्तों को मानने से इनकार कर दिया था, इसलिए उन्हें गिरफ़्तार करना पड़ा.
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार मज़बूत लोकपाल के पक्ष में है, लेकिन इसकी एक प्रक्रिया है और क़ानून बनाने का हक़ संसद को है.
उधर राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि वे प्रधानमंत्री के बयान से निराश हैं. उन्होंने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के मामलों को छिपाने में लगी है.
अरुण जेटली ने कहा, "देश के लोगों का सरकार पर से भरोसा उठ गया है. इसलिए देश का युवा सड़कों पर उतर आया है."
दूसरी ओर लोकसभा में भारी शोर-शराबे के बीच विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने सरकार पर आरोप लगाया कि वो असंतुलित व्यवहार कर रही है.
उन्होंने कहा कि सरकार ने संसदीय प्रक्रियाओं को दरकिनार करने का काम किया है. सुषमा ने पूछा कि अन्ना की टीम से बात करने की पहल किसने की.
वहीं गृह मंत्री पी चिदंबरम् ने कहा है कि क़ानून बनाने का हक़ सिर्फ़ और सिर्फ़ संसद का है इसलिए अन्ना हज़ारे की टीम की ये बात नहीं मानी जा सकती कि उनका जनलोकपाल विधेयक जस का तस स्वीकार किया जाना चाहिए.
































