सैकड़ों प्रदर्शनकारी हिरासत में

कोपेनहेगन में चल रहे संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में दुनिया भर से आए हज़ारों लोगों ने रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया है.
डेनमार्क की पुलिस का कहना है कि उसने 900 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है.
कुछ प्रदर्शनकारियों के पथराव करने के बाद पुलिस ने यह क़दम उठाया है.
टेलीविज़न पर दिखाया गया है कि इन लोगों के हाथ पीछे बांधकर उन्हें सड़क पर ही बिठाकर रखा गया है.
इसी तरह के प्रदर्शन दुनिया के कई अन्य देशों में भी हुए हैं.
ये लोग दुनिया भर से पहुँच रहे नेताओं पर दबाव बनाना चाहते हैं कि वे कड़े से कड़े क़दम उठाएँ.
एक हफ़्ते से चल रहे इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए दुनिया भर के नेताओं के पहुँचने का सिलसिला शुरु हो गया है. वे वहाँ पहले से ही मौजूद प्रतिनिधियों के साथ जलवायु परिवर्तन के मसले पर चर्चा में हिस्सा लेंगे.
इस सम्मेलन पर दबाव है कि वह क्योटो संधि को आगे बढ़ाने वाली किसी संधि पर सहमति बनाए और आने वाले दशकों में कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए क़ानूनी रुप से बाध्यकारी कोई समझौता करे.
सम्मेलन के आयोजकों ने इस संबंध में क़दम उठाते हुए शुक्रवार को समझौते के दो मसौदे पेश किए हैं.
प्रदर्शन
प्रदर्शनकारियों ने कोपेनहेगन में छह किलोमीटर लंबे रास्ते से होकर सम्मलेन स्थल तक रैली निकाली.
विरोध प्रदर्शन के आयोजकों का दावा है कि दुनिया भर से लगभग एक लाख लोग इसमें हिस्सा लेने पहुँचे हैं लेकिन पुलिस का कहना है कि इस रैली में 30 हज़ार लोगों ने हिस्सा लिया है.
पुलिस ने इस रैली के लिए सुरक्षा इंतज़ाम बढ़ा दिए थे और रास्तों में अतिरिक्त बल की तैनाती की थी.
प्रदर्शन आमतौर पर शांतिपूर्ण रहा लेकिन कुछ प्रदर्शनकारियों ने डेनिश स्टॉक एक्सचेंज पर पथराव किया.
बीबीसी के संवाददाता मैट मैक्ग्राथ का कहना है कि प्रदर्शन कई रंगों में रंगा हुआ था. कुछ ने 'पोलर बेयर' की तरह रूप धर रखा था तो कुछ ने पृथ्वी की चिंता प्रकट करते हुए नीले-हरे रंग के कपड़े पहन रखे थे.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार प्रदर्शन में शामिल होने के लिए ताइवान से आए 28 वर्षीय लिन ची कहते हैं, "दुनिया भर के नेताओं को बताने के लिए यह सही समय है कि यह हम सबके लिए गंभीर मसला है. उम्मीद है कि वे सुनेंगे."
कई अहम व्यक्तित्व भी

इन प्रदर्शनों में हिस्सा लेने के लिए दुनिया भर से कई महत्वपूर्ण व्यक्ति भी पहुँचे हैं.
इनमें बॉलीवुड अभिनेता राहुल बोस, मॉडल और फ़ोटोग्राफ़र हेलेना क्रिस्टेनसेन और संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार आयोग के पूर्व प्रमुख मैरी रॉबिनसन भी शामिल थे.
इसमें भाग लेने वालों में शांति नोबेल विजेता आर्चबिशप डेसमंड टूटू भी पहुँचे थे.
उन्होंने कहा, "कुछ लोग सोचते है कि अमीर बच निकलेंगे... या तो हम साथ तैरेंगे या साथ डूबेंगे. हमारी दुनिया एक है और हम इस सुंदर दुनिया को अपनी सुंदर युवा पीढ़ी के लिए छोड़ के जाना चाहते है."
इसी तरह प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे ग्रीनपीस के कार्यकारी निदेशक कुमी नाइडु ने कहा, "हम यहां बहुत आशाएँ ले कर आए हैं, अब एक हफ्ता बचा है और इसमें हमारी पूरी कोशिश होगी कि वे हमारी मांगे पूरी करें. हम ये सुनिशि्चत करना चाहते हैं कि इतिहास कोपनहेगन को होपनरहेगन यानी आशा की किरण के रुप में देखे. ये फ्लॉपनहेगन न बने यानि व्यर्थ न जाए. हम ये संदेश देना चाहते है कि ये करने की शक्ति उनके पास है बस थोड़ी सी कमी है तो वो राजनीतिक इच्छाशक्ति की है. पर हमारा मानना कि वार्ताकार एक निष्पक्ष, महत्वाकांशी और क़ानूनी रुप से बाध्यकारी संधि पर 18 दिसंबर तक सहमति बना सकेंगे."
कोपेनहेगन के अलावा ऑस्ट्रेलिया, हांगकांग, जकार्ता और फ़िलिपीन्स में भी प्रदर्शन हुए हैं.












