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रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे धुरंधरों के रहते न्यूज़ीलैंड के सामने क्यों बेबस रही टीम
- Author, संजय किशोर
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
- पढ़ने का समय: 8 मिनट
ऐसा लगता है कि ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पांच मैचों की टेस्ट सिरीज़ चार सीनियर खिलाड़ियों-रोहित शर्मा, विराट कोहली, रविंद्र जडेजा और रविचंद्रन अश्विन के लिए आख़िरी हो सकती है.
चारों सीनियर खिलाड़ी अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के आख़िरी पड़ाव पर हैं.
रोहित शर्मा की अगुआई वाली टीम इंडिया टॉम लैथम की कप्तानी वाली न्यूज़ीलैंड से टेस्ट सिरीज़ 0-3 से हार गई.
बेंगलुरु में पहले टेस्ट में भारत को तेज़ गेंदबाज़ी के सामने संघर्ष करना पड़ा. पुणे और मुंबई में दूसरे, तीसरे टेस्ट में स्पिन के कारण हार का सामना करना पड़ा.
भारतीय बल्लेबाज़ विपक्षी गेंदबाज़ी आक्रमण के सामने बेहाल दिखे जबकि भारतीय स्पिन गेंदबाज श्रृंखला के दौरान कीवी बल्लेबाज़ों के सामने ख़तरा पैदा करने में नाकाम रहे.
छह पारियों में केवल दो बार, भारत 200 रन के आंकड़े को पार कर पाया. न्यूज़ीलैंड ने बेंगलुरु में सिरीज़ के शुरुआती दिन से ही भारत पर दबाव बनाए रखा.
तीन या अधिक मैचों की सिरीज़ में भारत का पहला घरेलू टेस्ट वाइटवॉश रहा. कप्तान रोहित शर्मा तीन टेस्ट की छह पारियों में 91 जबकि विराट कोहली 93 रन बना पाए.
उसके बाद से यह चर्चा गर्म है कि बीसीसीआई ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद इन वरिष्ठ भारतीय खिलाड़ियों के भविष्य पर फ़ैसला कर सकती है.
रोहित और कोहली से निराशा
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड अगले विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप (डब्ल्यूटीसी) चक्र की शुरुआत से पहले चरणबद्ध तरीक़े से टीम में बदलाव लाने पर विचार कर रही है.
अभी तक भारत को डब्ल्यूटीसी फ़ाइनल के लिए क्वॉलिफ़ाई करने के लिए बॉर्डर गावस्कर-ट्रॉफ़ी में ऑस्ट्रेलिया के 4-0 से हराने की बड़ी चुनौती है.
टीम इंडिया के मौजूदा फ़ॉर्म को देखते हुए इस तरह के परिणाम की उम्मीद बेमानी होगी.
आँकड़ों पर नजर डालें तो 2021 से रोहित शर्मा ने घरेलू मैदान पर 20 टेस्ट की 35 पारियों में 35.58 की औसत से चार शतकों के साथ 1210 रन बनाए हैं.
पिछली 10 पारियों में भारतीय कप्तान छह बार 10 रन से कम के स्कोर और दो बार 20 से कम के स्कोर पर आउट हुए हैं.
इसी अवधि में विराट कोहली ने घरेलू मैदान पर 25 पारियों में 30.91 की औसत से 742 रन बनाए हैं और अहमदाबाद की सपाट पिच पर एक शतक लगाया है.
क्रिकेट के जानकार मानते हैं कि विराट कोहली और रोहित शर्मा की परेशानी की सबसे बड़ी वजह है घरेलू क्रिकेट नहीं खेलना है.
विशेषज्ञों की राय है कि अभ्यास मैच की कमी और ख़राब शॉट चयन टीम के निराशाजनक बल्लेबाज़ी प्रदर्शन के कारणों में से हैं.
घरेलू क्रिकेट से दूरी
विराट कोहली, रोहित शर्मा, रविंद्र जडेजा और रविचंद्रन अश्विन घरेलू टेस्ट सीज़न से पहले 2024 दलीप ट्रॉफ़ी में खेल सकते थे. वैसे भी टी20 वर्ल्ड कप के बाद बहुत कम क्रिकेट हुआ.
वरिष्ठ खिलाड़ी इस समय का उपयोग घरेलू क्रिकेट खेलने में कर सकते थे. स्टीव स्मिथ जैसे खिलाड़ी अभी भी अंतर्राष्ट्रीय सीज़न के दौरान शेफ़ील्ड शील्ड खेलते हैं.
शायद आपको यह जानकर हैरानी होगी कि कोहली ने आख़िरी रणजी ट्रॉफ़ी मैच 2013 में उत्तर प्रदेश के ख़िलाफ़ ग़ाज़ियाबाद में खेला था. उस मैच में वीरेंद्र सहवाग, गौतम गंभीर, आशीष नेहरा, ईशांत शर्मा, सुरेश रैना, मोहम्मद कैफ और भुवनेश्वर कुमार भी शामिल थे.
ये आख़िरी मैच था, जिसमें एक साथ इतने स्टार खिलाड़ी खेल रहे थे. रोहित का मुंबई के लिए आख़िरी रणजी ट्रॉफ़ी मैच 2015 में था.
उसके बाद, दोनों ने एक-एक प्रथम श्रेणी मैच खेला- कोहली ने श्रीलंका दौरे (2017) से पहले इंडिया-ए के लिए और रोहित ने दक्षिण अफ़्रीका (2019) के ख़िलाफ़ घरेलू श्रृंखला से पहले इंडिया-ए के लिए.
सचिन और शागिर्दों में यही है फ़र्क़
रोहित शर्मा ने 64 टेस्ट सहित 125 फ़र्स्ट क्लास मैच खेले हैं. वहीं विराट कोहली ने 125 जिनमें 118 टेस्ट मैच शामिल हैं.
सचिन तेंदुलकर ने अपने 200 टेस्ट सहित 310 प्रथम श्रेणी खेल खेले. मास्टर ब्लास्टर ने अपने व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के बावजूद 24 वर्षों में टूर गेम्स सहित 110 प्रथम श्रेणी मैच खेले.
सवाल है कि खिलाड़ियों के पास घरेलू क्रिकेट के लिए समय कहाँ है? साल भर खेलते तो नहीं रह सकते. कुछ वक़्त तो छुट्टियों और परिवार के साथ समय बिताने के लिए मिलना चाहिए.
साल 2021 की शुरुआत से रोहित ने 20 टेस्ट, 41 वनडे और 51 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं. इसके अलावा पिछले चार साल में आईपीएल में 57 मैच में हिस्सा लिया है.
वहीं इसी अवधि में विराट कोहली ने 31 टेस्ट 44 वनडे और 40 अंतरराष्ट्रीय टी-20 मैच खेले हैं. जहां तक आईपीएल की बात है, कोहली ने चार साल में 60 मैच खेले हैं.
ऑस्ट्रेलिया दौरा कठिन चुनौती
इसमें कोई शक नहीं कि ऑस्ट्रेलिया की पिचें बल्लेबाज़ी के लिए काफ़ी बेहतर होंगी, लेकिन इस तरह के अपमानजनक हार के बाद, खिलाड़ियों के लिए आत्मविश्वास हासिल करना आसान नहीं होगा.
वैसे ऑस्ट्रेलिया में विराट कोहली का प्रदर्शन ज़बरदस्त रहा है. ऑस्ट्रेलिया में कोहली का औसत 54 का है, उन्होंने 13 मैचों में छह शतक और चार अर्द्धशतक के साथ 1,352 रन बनाए हैं. वहीं रोहित शर्मा ने सात टेस्ट मैचों में 31.38 की औसत से 408 रन बनाए हैं.
दोनों ने 2018-19 और 2020-21 में ऑस्ट्रेलिया में दो श्रृंखला जीत में अहम भूमिका निभाई थी.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कोहली अपनी फ़िटनेस बरकरार रखते हैं और फ़ॉर्म हासिल कर पाते हैं तो वह टीम में हो सकते हैं, लेकिन रोहित के लिए विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के इस चक्र से आगे खेलना मुश्किल होगा. जो भी हो, देर-सबेर इन दो महान खिलाड़ियों का विकल्प देखना ही पड़ेगा.
जन्म से पहले करियर तय
क्रिकेट के लंबे स्वरूप में नए उभरते हुए खिलाड़ियों में देवदत्त पडिक्कल और साई सुदर्शन तेज़ी से अपनी पहचान बनाई है.
पडिक्कल और साईं सुदर्शन रोहित शर्मा और विराट कोहली के विकल्प हो सकते हैं.
बाएं हाथ के दोनों बल्लेबाज़ों में कौशल, लचीलापन और बड़े रनों की भूख है. ये गुण खेल के सबसे लंबे प्रारूप में सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं.
आपको हैरानी हो सकती है. देवदत्त पडिक्कल की यात्रा उनके जन्म से पहले ही शुरू हो गई थी. दरअसल, उनके माता-पिता चाहते थे कि कोख में पल रहा उनका दूसरा बच्चा क्रिकेटर ही बने. देवदत्त ने उनके सपने का मान रखा.
पडिक्कल ने तेज़ी से प्रगति की है, पहले कर्नाटक के साथ घरेलू क्रिकेट में, फिर आईपीएल में और इंडिया-ए टीम के साथ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है. इस सीज़न कर्नाटक के लिए तीन शतक बना चुके हैं.
ऑस्ट्रेलिया-ए के ख़िलाफ़ साईं सुदर्शन के साथ 196 रनों की पारी उनके धैर्य का उदाहरण है. पहले फुटवर्क को लेकर उनकी आलोचना होती थी.
आईपीएल में लखनऊ सुपर जाइंट्स के कोच जस्टिन लैंगर ने उनकी तकनीक दुरुस्त कराई. अब वह अपनी आँखें गेंद पर टिकाना सीख गए हैं.
साई की सुदर्शन बल्लेबाज़ी
पडिक्कल के खेल में आक्रामकता है तो साई सुदर्शन की बल्लेबाज़ी में अनुशासन और धैर्य है. आज के दौर के अधिकतर खिलाड़ियों की तरह आक्रामक खेल की बजाय सुदर्शन ने लंबी पारी खेलने की अपनी क्षमता के ज़रिए पहचान बनायी है.
अनुशासन और धैर्य ये दोनों गुण टेस्ट क्रिकेट के लिए सबसे अहम है. ऑस्ट्रेलिया-ए के ख़िलाफ़ 103 रन उनके धीरज का परिचायक था.
सुदर्शन की बल्लेबाज़ी शैली में दृढ़ता और एकाग्रता पर जोर है. दलीप ट्रॉफ़ी में उनका शतक दबाव में प्रदर्शन करने की उनकी क्षमता को रेखांकित करती हैं.
अश्विन और सुंदर में समानता
न्यूज़ीलैंड के साथ सिरीज़ में सबसे सकारात्मक पहलू था 25 साल के वॉशिंगटन सुंदर का प्रदर्शन. चार सील के अंतराल के बाद टेस्ट खेल रहे सुंदर बॉलिंग ऑलराउंडर हैं.
बाएं हाथ के बल्लेबाज़ और दाएँ हाथ के ऑफ़ ब्रेक गेंदबाज़ ने सिरीज़ में सबसे ज़्यादा 16 विकेट लिए और रविचंद्रन अश्विन की विरासत को संभालने के लिए तैयार नज़र आ रहे हैं.
तमिलनाडु के ही आर अश्विन की तरह, वॉशिंगटन सुंदर पहले बल्लेबाज़ बनना चाहते थे. लेकिन फिर एक ऑफ़ स्पिनर के रूप में अपना नाम बनाने में कामयाब रहे. पूर्व भारतीय स्पिनर अमित वेंकटरमना से उन्होंने स्पिन की बारिकियाँ सीखी हैं.
2016 अंडर-19 विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद, उन्होंने 2017 के आईपीएल में राइजिंग पुणे सुपरजायंट में अश्विन की जगह ली और प्रभावशाली इकॉनमी रेट से गेंदबाज़ी करके अपनी टीम को फाइनल में पहुंचाया था. तब उन्होंने 11 मैचों में आठ विकेट लिए थे.
वॉशिंगटन सुंदर 2016 से फ़र्स्ट क्लास क्रिकेट खेल रहे हैं. उन्होंने बतौर ओपनर करियर शुरू किया था. लेकिन बाद में बल्लेबाज़ी क्रम में नीचे चले गए. अब तक 33 मैचों में 81 विकेट ले चुके हैं. 2017 से सीमित ओवरों का क्रिकेट खेल रहे हैं. 2021 से अब तक छह टेस्ट मैचों में 22 शिकार बनाए हैं.
वॉशिंगटन सुंदर अगले 10 वर्षों के लिए एक मज़बूत संभावना के रूप में उभर रहे हैं. सुंदर की हरफ़नमौला क्षमता और महत्वपूर्ण क्षणों में विकेट लेने की क्षमता उन्हें बेहतर विकल्प बना सकती है.
क्षेत्ररक्षण में उनकी चपलता उन्हें दूसरे विकल्पों से आगे रखती है. इसी अक्टूबर रणजी ट्रॉफ़ी में दिल्ली के ख़िलाफ़ 152 रन की बेहतरीन पारी खेली थी और मैच में छह विकेट भी लिए थे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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