You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
ओमान में एक पाकिस्तानी ने ऐसे बचाई दो 'भारतीय नागरिकों' की जान
- Author, मोहम्मद ज़ुबैर ख़ान
- पदनाम, बीबीसी उर्दू
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
21 मार्च को ओमान की राजधानी मस्कट मूसलाधार बारिश की चपेट में थी. बारिश के कारण मस्कट से लगभग 45 किलोमीटर दूर विलाया बरका के पास एक पुल पर यातायात पूरी तरह से ठप हो गया था.
इसी दौरान अचानक एक गाड़ी बहती हुई पुल के नीचे नज़र आई. मजमे में खड़े लोग अभी ये मंजर देख ही रहे थे कि इसी हुजूम में शामिल एक नौजवान ने किसी ख़तरे की परवाह किए बगैर गाड़ी में फंसे लोगों की जान बचाने की ठानी.
ये नौजवान थे शहज़ाद ख़ान, जो पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत के चारसद्दा के रहने वाले हैं. पानी के तेज़ बहाव के बावजूद, जब कार पुल के एक खंभे से टकराकर रुकी, तो शहज़ाद ख़ान बाहर निकले और कार के दरवाज़े का ताला तोड़कर अंदर फंसे दो लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया.
इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें शहज़ाद ख़ान नज़र आ रहे हैं. घटना के चश्मदीदों में बिस्मिल्लाह जान भी शामिल थे. बिस्मिल्लाह शहज़ाद ख़ान के साथ मौजूद थे.
बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने बताया, "शहज़ाद मेरे साथ ही खड़े थे. पानी का तेज़ रेला गुज़र रहा था. अचानक हमने देखा कि एक गाड़ी पानी में बह रही है और अगले ही पल शहज़ाद उसकी तरफ दौड़ पड़े."
"हम सब ने शहज़ाद को रोकने की कोशिश की, मगर वो नहीं रुके. जब गाड़ी रुकी तो मैंने ही उन्हें लॉक तोड़ने के लिए पत्थर दिए थे."
शहज़ाद ख़ान ख़ुद कहते हैं, "वहां तीन से चार सौ लोग मौजूद थे, मगर पानी का बहाव इतना तेज़ था कि कोई क़रीब जाने की हिम्मत नहीं कर रहा था. मैं ख़ुद को रोक नहीं सका. जब गाड़ी मेरे क़रीब से गुज़री तो मैंने देखा कि एक शख़्स बेबसी से मदद के लिए इधर-उधर देख रहा है."
वायरल वीडियो में क्या है?
इस घटना का एक वायरल वीडियो सामने आया है, जिसमें ओमान के एक हाईवे पर बने पुल के नीचे तेज़ गति से बहता पानी और उसमें पलटी हुई एक सफेद कार दिखाई दे रही है.
पुल के ऊपर दर्जनों लोग जमा हैं, कुछ परेशानी से नीचे झांक रहे हैं और कुछ मदद के लिए हाथ बढ़ाए खड़े हैं.
वीडियो में देखा जा सकता है कि गाड़ी बाढ़ के पानी में बहकर पुल के एक खंभे से टकराकर रुक चुकी है. तभी भूरे रंग के कपड़े पहने एक नौजवान पुल के किनारे से नीचे उतरता है और गाड़ी तक पहुंचकर अंदर फंसे हुए शख़्स तक पहुंचने की कोशिश करता है.
इस दौरान पुल के ऊपर खड़े लोग भी उसकी मदद के लिए झुक जाते हैं, कुछ लोग हाथ बढ़ाते हैं ताकि पीड़ित शख़्स को ऊपर खींचा जा सके.
कुछ लम्हों की जद्दोजहद के बाद, शहज़ाद गाड़ी में फंसे शख़्स को बाहर निकालने में कामयाब हो जाते हैं. फिर पुल पर मौजूद लोग मिलकर उस व्यक्ति को ऊपर खींच लेते हैं.
'मेरी आंखों के सामने स्वात की बाढ़ दौड़ रही थी'
शहज़ाद ख़ान ने बीबीसी के साथ बात करते हुए कहा कि ओमान में बारिश बहुत कम होती है. उनके मुताबिक़, उस दिन ईद की छुट्टियों की वजह से वो दोस्तों के साथ सैर करने निकले और उन्होंने मछली भी पकड़ी थी.
उन्होंने बताया, "जब मैं मछली वापस कमरे में रखकर बाहर निकला तो बारिश ने तबाही मचा दी थी. कई लोग विलाया बरका इलाक़े में इस पुल के आस-पास खड़े थे. अचानक मैंने पानी में बहती हुई गाड़ी देखी. मुझे लगा कि इसमें एक ही व्यक्ति है, मगर बाद में पता चला कि अंदर दो लोग थे."
शहज़ाद कहते हैं, "जब गाड़ी पानी में बह रही थी तो मैंने देखा कि अंदर मौजूद एक शख़्स बेचारगी से लोगों को देख रहा है कि कोई तो मदद करो. मेरी आंखों के सामने स्वात में बाढ़ से हुई त्रासदी ज़िंदा हो उठी."
शहज़ाद का कहना था कि "स्वात में एक पर्यटक परिवार के पानी में डूब जाने की घटना और उसके वीडियो ने मेरा दिल छलनी कर दिया था. अगर कोई चाहता तो उनकी मदद हो सकती थी."
शहज़ाद ख़ान ने कहा, "स्वात में एक पर्यटक परिवार के डूबने की घटना और उसका वीडियो देखकर मेरा दिल टूट गया था. अगर कोई चाहता तो उनकी मदद की जा सकती थी."
ग़ौरतलब है कि जून 2025 में पाकिस्तान की स्वात नदी के बीच फँसे एक परिवार का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे अचानक आई बाढ़ में फँसने के बाद मदद की गुहार लगा रहे थे. लेकिन कोई उनकी मदद नहीं कर पाया और नौ लोगों का ये पानी में डूब कर मर गया.
उनका कहना था, "पानी के बहाव में गाड़ी को रोकना मुश्किल था. मैंने एक-दो बार कोशिश की, मगर ऐसा नहीं हो सका. गाड़ी भी उलटी हो गई, तो मैं चलता जा रहा था और रोकने की कोशिश करता जा रहा था कि तभी गाड़ी पुल के खंभे से टकराकर रुक गई थी."
"फिर मैं गाड़ी के पास गया. मुझे मेरे साथी बिस्मिल्लाह ने पत्थर दिया कि लॉक तोड़ो. उस पत्थर से लॉक नहीं टूटा, तो उन्होंने दूसरा पत्थर दिया. उसके बाद मैंने ख़ुद लॉक खींचा, तो टूट गया. शायद वो पत्थर की मार से कमज़ोर हो चुका था."
"पहले तो मेरा ख़याल था कि गाड़ी में एक बंदा है, मगर जब दरवाज़ा खोला तो देखा कि फ्रंट सीट पर दो लोग हैं. एक व्यक्ति नीचे और दूसरा उसके ऊपर गिरा हुआ था. दोनों बहुत डरे हुए थे."
"मैंने पहले जो बंदा ऊपर था, उसको गाड़ी में से निकाला, फिर नीचे दबे हुए शख़्स को निकाला. पुल के ऊपर बहुत लोग इकट्ठे थे, जिन्होंने उन दोनों को पकड़कर ऊपर खींच लिया."
उनका कहना था, "वहां पर काफ़ी तादाद में पाकिस्तानी, भारतीय और बांग्लादेशी थे. मेरे साथ काम करने वाले कुछ भारतीय भी वहां मौजूद थे."
'उन्होंने बताया कि गाड़ी में सवार दोनों लोग भारतीय थे'
शहज़ाद ख़ान का कहना था कि "वो जो कोई हों, उस वक़्त वो मुश्किल का शिकार थे. उस गाड़ी में कोई भी होता, मैं उसकी मदद के लिए ज़रूर जाता."
ओमान में पाकिस्तान सोशल क्लब के डायरेक्टर शद्दार बुख़ारी के मुताबिक भी शहज़ाद ने जिन लोगों की मदद की, वो भारतीय हैं.
24 मार्च की मस्कट डेली की ख़बर के मुताबिक भी गाड़ी में फंसे दोनों लोग भारत से थे. हालांकि, बीबीसी इन दोनों व्यक्तियों की नागरिकता की पुष्टि नहीं कर पाया है.
मलयालम वेबसाइट माध्यमम ने भी लिखा है कि शहज़ाद ने जिन दो लोगों को बचाया वो भारतीय हैं.
ओमान में पाकिस्तान सोशल क्लब के डायरेक्टर शानदार बुख़ारी कहते हैं कि वो "कोशिश करेंगे कि शहज़ाद ख़ान को कोई अच्छी नौकरी मिल सके."
शहज़ाद ख़ान के पिता चारसद्दा के इलाक़े शबकदर में किराने की दुकान चलाते हैं. शहज़ाद ख़ान चार बहन-भाइयों में सबसे छोटे हैं और उन्होंने इंटरमीडिएट तक पढ़ाई की है.
शहज़ाद ख़ान का कहना था कि वो कुछ अरसा पहले कर्ज़ लेकर ओमान आए थे.
उन्होंने बीबीसी को बताया, "मैं दिहाड़ी मज़दूरी करने के अलावा नौकरी तलाश करता रहता हूं. मुझे उम्मीद है कि एक दिन मुझे अच्छा काम मिल जाएगा."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.