शनिवार को ऐसा क्या हुआ है जिससे मध्य-पूर्व का संकट और गंभीर हो गया

    • Author, बीबीसी न्यूज़ मुंडो
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ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका और इसराइल के सैन्य अभियान शुरू होने के एक महीने बाद शनिवार को एक नया मोर्चा खुल गया है.

शनिवार को यमन से इसराइली इलाके की ओर मिसाइलें दागी गईं. 28 फ़रवरी को ईरान के ख़िलाफ़ हमले शुरू होने के बाद से ईरान ने न केवल इसराइल के, बल्कि अमेरिका के सहयोगी खाड़ी देशों के ख़िलाफ़ भी जवाबी हमले किए हैं.

वहीं इसराइल ने लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ख़िलाफ़ अपने हमले तेज कर दिए हैं.

यमन से हुए हमले के बारे में जानकारी शनिवार सुबह इसराइल डिफ़ेंस फ़ोर्सेज (आईडीएफ़) ने अपने टेलीग्राम चैनल पर जारी की. आईडीएफ़ ने कहा कि उनके एयर डिफ़ेंस सिस्टम 'ख़तरे को रोकने के लिए पूरी तरह से काम कर रहे हैं.'

15 मिनट बाद उसी चैनल के जरिए, सेना के अधिकारियों ने बताया कि उन मिसाइलों को रोक लिया गया था और इससे कोई जान-माल का नुक़सान नहीं हुआ.

यमन के कुछ हिस्सों पर नियंत्रण रखने वाले इस्लामी गुट हूती विद्रोहियों ने कुछ घंटों बाद पुष्टि की कि उन्होंने ईरान, लेबनान, इराक़ और फ़लस्तीनी इलाक़ों पर उस देश के हमलों के जवाब में 'इसराइल के रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर' बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं.

उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि उनके हमले तब तक जारी रहेंगे "जब तक सभी प्रतिरोध मोर्चों के ख़िलाफ़ आक्रामकता बंद नहीं हो जाती."

ये हमले हूती विद्रोही गुट के प्रवक्ता याह्या सरी की कुछ घंटे पहले दी गई चेतावनी की पुष्टि करते हुए मालूम होते हैं.

याह्या सरी ने कहा था, "हम सीधे सैन्य हस्तक्षेप के लिए तैयार हैं."

बीबीसी के मध्य-पूर्व ब्यूरो के प्रमुख जो फ़्लोटो ने लिखा, "इस संघर्ष में हूती विद्रोहियों के शामिल होने से बड़े पैमाने पर युद्ध की संभावना बढ़ जाती है, जिसमें अरेबियन पैनिनसुला पर एक नया मोर्चा खुल सकता है."

आर्थिक मोर्चे पर असर

इस आशंका से बाज़ारों में पिछले लगभग एक महीने से चल रही उथल-पुथल और भी ज़्यादा बढ़ सकती है.

इसकी वजह क्या है? इस इस्लामी गुट का 2014 से ही उत्तर-पश्चिमी यमन पर कब्ज़ा है. इसी वजह से दुनिया के एक और मुख्य व्यापारिक मार्ग रेड सी (लाल सागर) पर भी इसका नियंत्रण है.

2023 के आखिर में सात अक्तूबर के हमलों के बाद इसराइल और हमास के बीच चल रहे युद्ध के दौरान हूती विद्रोही हमास के साथ खड़े रहे हैं. हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन भी हासिल है.

फ़लस्तीनियों के साथ एकजुटता दिखाते हुए इन्होंने लाल सागर से होते हुए स्वेज़ नहर की ओर जाने वाले मालवाहक जहाज़ों पर हमलों की एक पूरी श्रृंखला शुरू कर दी थी.

हूती गुट के ड्रोन और मिसाइल हमलों ने कई जहाज़ों को निशाना बनाया, जिनमें से कुछ तो डूब भी गए.

इसके चलते शिपिंग कंपनियों को ज़्यादा सुरक्षित, लेकिन साथ ही ज़्यादा लंबे और महंगे वैकल्पिक रास्तों को अपनाना पड़ा. उन्हें दक्षिणी अफ़्रीका में 'केप ऑफ़ गुड होप' के रास्ते से गुज़रना पड़ा. इस वजह से सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारी रुकावटें पैदा हो गईं.

इन हमलों के चलते अमेरिका, ब्रिटेन और दूसरे देशों ने इस ग्रुप के ठिकानों पर बमबारी का अभियान शुरू किया और रास्ते को फिर से खोलने के लिए जंगी जहाज़ भेजे.

2025 में अमेरिका ने यमन में इस ग्रुप के ठिकानों पर फिर से हमला किया, ताकि ऐसी और घटनाओं को रोका जा सके जिनसे दुनिया के व्यापार पर असर पड़ता है.

लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा हालात में लाल सागर में ऐसे हमलों का फिर से होना, दुनिया की आर्थिक स्थिति को और भी ज़्यादा ख़राब कर सकता है.

क्योंकि ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट को लगभग बंद कर दिया है, वहां से दुनिया का करीब 20 फ़ीसदी कच्चा तेल गुजरता है.

ब्रिटेन के जाने-माने थिंक टैंक 'चैथम हाउस' के शोधकर्ता फ़ारेआ अल मुस्लिमी ने बीबीसी को बताया, "हम पहले से ही एक बुरे सपने से गुज़र रहे हैं, और इससे हालात और भी बदतर हो जाएंगे."

खाड़ी के 5 देशों पर हमले

हमले करने वाले सिर्फ़ हूती ही नहीं हैं. शनिवार को फ़ारस/अरब खाड़ी के पांच देशों के अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने ईरान से उनकी सीमाओं की ओर छोड़े गए ड्रोन और मिसाइलों को बीच में ही रोक दिया.

सऊदी अरब के अधिकारियों ने बताया कि रियाद की ओर दागे गए तीन ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराया गया.

इस बीच, कुवैत की सिविल एविएशन एजेंसी ने बताया कि कई ड्रोन ने अमीरात के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमला किया, जिससे उसके रडार सिस्टम को काफ़ी नुकसान पहुंचा.

लेकिन कुवैत की समाचार एजेंसी केयूएनए के अनुसार, इसमें कोई हताहत नहीं हुआ.

इस बीच संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि एक ईरानी रॉकेट को बीच में ही रोक दिए जाने के बाद, उसका मलबा ज़मीन पर गिरने से पांच लोग जख़्मी हुए. ये पांचों लोग भारतीय नागरिक थे.

ओमान की सरकारी एजेंसी से मिली जानकारी के मुताबिक़, देश के दक्षिणी हिस्से में एक बंदरगाह के पास दो ड्रोन के क्रैश हो जाने से एक विदेशी कर्मचारी घायल हुआ.

ईरानी ने अपने हमलों की पुष्टि की और दावा किया कि उन्होंने दक्षिणी ओमान के सलालाह बंदरगाह से "काफी दूरी" पर मौजूद एक अमेरिकी सपोर्ट वेसल को नुकसान पहुँचाया है. यह रिपोर्ट तस्नीम समाचार एजेंसी ने दी, जिसका संबंध इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से है.

अब तक अमेरिका ने इस घटना की पुष्टि नहीं की है.

ट्रंप ने क्या दावा किया था?

ईरानी सेना ने यह भी दावा किया कि उसने हथियारों का एक ऐसा डिपो नष्ट कर दिया है, जिसे यूक्रेन ने कथित तौर पर संयुक्त अरब अमीरात को उसके ड्रोन को बेअसर करने के लिए सप्लाई किया था. यूक्रेन सरकार ने इस बात से इनकार किया है.

इस बीच, इसराइली सेना ने पुष्टि की है कि उसने ईरान और दक्षिणी लेबनान के ख़िलाफ़ अपनी बमबारी जारी रखी है.

बयान में कहा गया, "रात के दौरान, इसराइल आईडीएफ़ ने दक्षिणी लेबनान के कई इलाक़ों में दर्जनों ठिकानों पर हवाई और समुद्री हमले किए."

बयान में कहा गया, "आईडीएफ़ ने पूरे लेबनान में हिज़्बुल्लाह के आतंकवादी ठिकानों पर हमले जारी रखा है."

वहीं शिया गुट ने भी देश के उत्तरी हिस्से में इसराइली सैन्य ठिकानों पर हमला करने का दावा किया है.

ईरान के सूत्रों ने पुष्टि की कि शनिवार तड़के तेहरान के अलग-अलग हिस्सों में ज़ोरदार धमाकों की आवाज़ें सुनी गईं.

घटनाओं के इस क्रम ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके कुछ क़रीबी सहयोगियों की बातों पर संदेह पैदा कर दिया है, जिन्होंने हाल के घंटों में यह भरोसा दिलाया था कि दुश्मनी का अंत क़रीब है.

वहीं ट्रंप ने शुक्रवार को कहा, "ईरान तबाह हो रहा है. हम अभी उनसे बात कर रहे हैं. वे एक समझौता करना चाहते हैं."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.