ये बॉलीवुड है या हॉलीवुड?

- Author, कोमल नाहटा
- पदनाम, वरिष्ठ फ़िल्म समीक्षक
ग़ौर कीजिए इस हफ़्ते रिलीज़ हुई फ़िल्में फ़ॉक्स, थ्री-लव लाइज़ बिट्रेयल और बैचलर पार्टी.पिछले हफ़्ते रीलीज़ हुई थी डैडी कूल और टॉस.
आने वाले दिनों में हम देखेंगे ‘वांटेड’, ‘वेक अप सिड’, ‘डू नॉट डिस्टर्ब’, ‘ऑल द बेस्ट’, ‘ब्लू’, ‘लंडन ड्रीम्स’, ‘थ्री इडियट्स’, ‘प्रिंस’, ‘माई नेम इज़ ख़ान’, ‘व्हाट्स योर राशि?’ ‘एसिड फ़ैक्टरी’, ‘ऐक्सीडेंट ऑन हिल रोड’ और ‘रॉकेट सिंह-सेल्स मैन ऑफ़ द इयर’.
सच ये बॉलीवुड है या हॉलीवुड? अगर ऐसा ही रहा तो दर्शकों को सिलसिला की रेखा की तरह गाना पड़ेगा, “ये कहाँ आ गए हम...”
घई साहब की खु़शी
सुभाष घई ने अपनी ‘राइट या रॉंग’ देखने के बाद फ़िल्म के दो नायकों को फूल भेजे. फूलों के साथ दोनों को मुबारकबाद देने का कारण ये था कि बहुत समय बाद घई साहब को सनी का काम इतना ज़्यादा पसंद आया.
सुभाष जी के अनुसार इरफ़ान ख़ान ने भी सनी की तरह बेहद बढ़िया काम किया है.
सुभाष घई फ़िल्म से इतने ख़ुश हैं कि उन्होंने इसमें एक गीत शामिल करने का निर्णय लिया है. "जब फ़िल्म अच्छी बनी है तो एक दो करोड़ रूपए ख़र्च करने में खटकता नहीं है," घई साहब बोले.
इस सस्पेंस थ्रिलर में ईशा कोप्पिकर और कोंकणा सेन शर्मा भी हैं और इसका निर्देशन किया है नीरज पाठक ने जो सुभाष घई की परदेस में उनके साथ सह-लेखक थे.
तुषार ने क्या साबित किया

तुषार कपूर जितेंद्र के बेटे हैं, इसका सबूत अगर किसी को चाहिए था तो वह इस शनिवार को मिल गया.
जितेंद्र अपने ज़माने से फ़िल्म ट्रेड पत्रिकाओं के फ़ैन हैं. वह फ़िल्म के आंकड़ों में बहुत दिलचस्पी रखते हैं और आजकल के कलाकारों की तरह मेरी फ़िल्म हिट है, मेरी फ़िल्म हिट है, के नारे लगाने में यक़ीन नहीं करते हैं.
तो तुषार भी उनकी तरह ही सोचते हैं.
शनिवार को तुषार ने ‘लाइफ़ पार्टनर’ की पार्टी रखी थी.
अब आप तो जानते ही हैं कि ‘लाइफ़ पार्टनर’ हिट तो कहीं भी नहीं है तो फिर पार्टी कैसी. तुषार ने भी अपने एसएमएस में ये नहीं कहा कि वह ‘लाइफ़ पार्टनर’ हिट होने की ख़ुशी में वो पार्टी दे रहे हैं बल्कि ये लिखा है कि ‘लाइफ़ पार्टनर’ के कॉलेक्शन सुधर गए हैं इसलिए वो पार्टी दे रहे हैं.
अभी इतनी सच्चाई आजकल किसी हीरो में नहीं है. फ़्लॉप फ़िल्मों को भी हिट का लेबल लगाया जाता है और पार्टियाँ दी जाती हैं.
पर तुषार कपूर आख़िर जितेंद्र के बेटे जो ठहरे उन्होंने ऐसा कोई ग़लत दावा नहीं किया.
संजू बाबा बड़े बजट के लिए

संजय दत्त ने ये ठान ली है कि अब वो छोटे बजट की फ़िल्मों में काम नहीं करेंगे.
उनका सोचना है कि जब दर्शकों को हर चीज़ बड़ी अच्छी लगती है तो उतनी ही मेहनत छोटी फ़िल्मों में करना व्यर्थ है. इसलिए आजकल संजू बाबा सबसे पहले फ़िल्म का बजट पूछते हैं और उसके बाद कहानी सुनते हैं.
हां अगर कहानी में बहुत दम हो तो उन्हें छोटी फ़िल्म भी चलेगी वरना नहीं. बेचारे छोटे निर्माता कहाँ जाएंगे.
वैसे भी शाहरुख़ ख़ान, आमिर ख़ान, सलमान ख़ान, अक्षय कुमार और ऋतिक रोशन तो बड़ी से भी बहुत बड़ी फ़िल्मों में ही दिखाई देते हैं.
ईशा के इशारे
ईशा कॉप्पिकर अब शादी करने जा रही हैं. हालांकि शादी की तारीख़ पक्की नहीं हुई है मगर ईशा अब सेक्सी इमेज से हटने की कोशिश कर रही हैं.
जिन फ़िल्मों में ईशा काम कर रही हैं उनके निर्माता और निर्देशकों से वो विनती कर रही हैं कि न तो उनके सेक्सी सीन रखे जाएं और न ही उन्हें पहनने के लिए सेक्सी कपड़े दिए जाएं.
कोई ईशा को ये समझाए कि अगर ये दोनों बातें न हों तो भला कोई उन्हें साइन ही क्यों करेगा.
अब ईशा काजोल या प्रियंका चोपड़ा तो नहीं हैं कि उनके नाम से कोई फ़िल्म बिक जाए या फ़िल्म को चार चांद लग जाए.
लोकेशन तो लेगा टाइम

राजकुमार हिरानी ने ‘3 इडियट्स’ बनाने में क़रीब 105-110 दिन लिए हैं. और अब भी एक गाना और दो चार सीन शूट होने बाक़ी हैं.
इतने दिन एक फ़िल्म में हिरानी को ज़्यादा लग रहे हैं जबकि संजय लीला भंसाली जैसे निर्देशक फ़िल्म बनवाने के लिए इससे भी ज़्यादा दिन लगाते हैं.
क्या आमिर ख़ान की वजह से इस बार राजकुमार हिरानी को इतना समय लग गया?
क्योंकि आमिर जिस तरह के परफ़ेक्शनिस्ट हैं उन्हें हर सीन ओके करने में टाइम लगता है.
राजकुमार कहते हैं, “बिल्कुल नहीं आमिर जैसा बढ़िया स्टार मैंने देखा नहीं है. वो तो सेट पर टाइम से पहले पहुंच जाते थे और शटिंग भी फटाफट करते थे, हमें इस फ़िल्म में ज़्यादा दिन इसलिए लगे कि इसकी शूटिंग बहुत सारे शहरों में हुई. जब भी लोकेशन बदलता था, हमें नए लोकेशन में सेटल होने में कुछ दिन लग जाते थे. इसलिए इस फ़िल्म के बनने में हमें सौ से अधिक दिन लग गए.”
































