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असम: रेप अभियुक्त ने कोर्ट परिसर में पत्नी की 'हत्या' की, पुलिस भी हैरान
- Author, दिलीप कुमार शर्मा
- पदनाम, गुवाहाटी से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
असम के डिब्रूगढ़ ज़िले की अदालत परिसर में लोगों की मौजूदगी के बीच एक व्यक्ति ने धारदार चाक़ू से अपनी पत्नी की गला रेतकर हत्या कर दी.
यह घटना शुक्रवार सुबह क़रीब 10 बजकर 40 मिनट की है, जब ज़िला अदालत में कई मुक़दमों की सुनवाई के लिए लोग पहुंचे थे.
अदालत जैसी सुरक्षित जगह पर एक व्यक्ति का चाक़ू लेकर पहुंचना और फिर अपनी पत्नी का गला काट देने की इस घटना से ख़ुद पुलिस भी हैरान है.
पुलिस ने गला काटने की इस घटना में शामिल अभियुक्त की पहचान पूर्ण नाहर डेका के तौर पर की है.
35 साल के डेका डिब्रूगढ़ ज़िले के नाहरकटिया के लोंगबोंग अली सिंगा गांव के निवासी हैं.
ज़मानत पर छूटा था...
डिब्रूगढ़ थाना के प्रभारी सिद्धेश्वर बोरा ने घटना की जानकारी देते हुए बीबीसी से कहा, "पति-पत्नी के बीच पहले से विवाद था. दरअसल अभियुक्त पूर्ण नाहर डेका पर उनकी पत्नी रीता ने नाबालिग बेटी के साथ रेप का एक मामला कुछ महीने पहले दर्ज कराया था."
"उस मामले में अभियुक्त पिछले 9 महीनों से जेल में बंद था. वो हाल ही में जेल से ज़मानत पर छूटा था. जब वो जेल में था तो पत्नी उससे एक बार भी मिलने नहीं गई. पिछले 6 जून को जब अभियुक्त जेल से बाहर निकला तो गांव वालों के डर से घर नहीं गया और डिब्रूगढ़ में ही कहीं पर काम कर रहा था."
"इस गला रेतने की घटना से तीन दिन पहले उसने अपनी पत्नी से फ़ोन पर बात की थी. उसने फ़ोन पर पत्नी से अपनी ग़लतियों के लिए कहा था कि आगे से वो ऐसा कुछ नहीं करेगा. लिहाजा वो (पत्नी) अदालत में ऐसा बयान दे ताकि रेप के मामले की सज़ा से वो बच सके. 15 जून को उसके मामले की सुनवाई थी."
जेब से चाक़ू निकाल रेत दिया गला
सिद्धेश्वर बोरा का कहना है, "शुक्रवार को सुनवाई थी तो उसकी पत्नी भी कोर्ट आई थी. इस दौरान डेका का बड़ा भाई और उसकी पत्नी भी अदालत आए थे. बलात्कार के मामले में बड़े भाई की पत्नी ही गवाह थी. इन लोगों को देखकर डेका थोड़ा ग़ुस्से में था. वे लोग अदालत के बाहर बरामदे में बैठे हुए थे."
"इस बीच डेका की अपनी पत्नी के साथ किसी बात पर तकरार हुई और उसने अचानक जेब से चाक़ू निकाल पत्नी का गला रेत दिया. ख़ून से लथपथ पीड़ित महिला जमीन पर गिर गई. जब वो अदालत से भागने लगा तो वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और अन्य लोगों ने उसे पकड़ लिया."
"ज़ख़्मी महिला को फौरन असम मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया."
डिब्रूगढ़ पुलिस ने आईपीसी की धारा 302 और के 506 के तहत डेका के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है.
पुलिस का क्या है कहना?
इस बीच शनिवार को पुलिस ने अभियुक्त को अदालत में हाज़िर किया था, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है. इस पूरी घटना ने अदालत जैसे सुरक्षित परिसर को सवालों को घेरे में ला दिया है.
पुलिस अधिकारी बोरा कहते है, "अदालत परिसर में ऐसी घटना को अंजाम देना इतना आसान नहीं है. अदालत में पुलिस रहती है, लेकिन ये घटना इतनी अचानक हुई कि प्रतिक्रिया करने का कोई समय नहीं था. घटना की तहक़ीकात से पता चला है कि अभियुक्त अपनी पत्नी पर हमले की योजना बना कर आया था."
इस घटना को कवर करने वाले स्थानीय पत्रकार अभीक चक्रवर्ती कहते हैं, "अदालत में सुरक्षा व्यवस्था तो है और उस दिन भी दो-तीन सुरक्षा गार्ड थे. लेकिन फिर भी ऐसी घटना कैसे हो गई, पुलिस भी नहीं बता पा रही है. सुरक्षा में चूक तो हुई है वरना छुरी लेकर कोई अदालत परिसर के भीतर कैसे चला जाएगा."
"अगर सुरक्षा सही रहती तो यह घटना नहीं होती. कोर्ट में दाख़िल होने से पहले वहां मेटल डिटेक्टर से गुजरना पड़ता है, लेकिन इस घटना में कहीं न कहीं सुरक्षा में लापरवाही हुई है."
सुरक्षा पर उठे सवाल
असम में 30 अक्टूबर 2008 में हुए सीरियल बम धमाकों में एक धमाका गुवाहाटी के ज़िला एवं सत्र अदालत परिसर में हुआ था जिसमें कई वक़ीलों की मौत हो गई थी.
उस घटना के बाद राज्य सरकार ने अदालत परिसर की सुरक्षा को लेकर कुछ उपाय ज़रूर किए थे, लेकिन डिब्रूगढ़ ज़िला अदालत में हुई घटना ने एक बार फिर सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
इस संदर्भ में डिब्रूगढ़ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकिल अजीत बोरगोहाईं कहते हैं, "ऐसी घटना होनी नहीं चाहिए थी. सुरक्षा में कहीं कोई लापरवाही हुई है. पहले यहां मेटल डिटेक्टर लगा हुआ था, लेकिन अब नहीं है. इस घटना के तुरंत बाद हमने वक़ीलों ने अदालत परिसर की सुरक्षा को लेकर जज के साथ बैठक की है."
"अदालत परिसर की सुरक्षा व्यवस्था मज़बूत करने को लेकर कई निर्णय लिए गए हैं. ऐसी घटना इस अदालत में पहले कभी नहीं हुई. लेकिन अब हम काफ़ी सतर्क हैं."
"हमने इस घटना की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में करवाने की अपील के बारे में भी चर्चा की है. ऐसे मामले में अभियुक्त को जल्द सजा मिलनी चाहिए. इस घटना के तो चश्मदीद भी हैं. हम जल्द ही फास्ट ट्रैक कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के लिए अपील करेंगे."
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