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अनिल अंबानी को इस कॉन्ट्रैक्ट में लाने का फ़ैसला किसने किया? राहुल गांधी
संसद में शुक्रवार को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बीच रफ़ाल मुद्दे को लेकर तीखे सवाल-जवाब का सिलसिला चला.
राहुल गांधी ने बहस पर चर्चा शुरू करते हुए सीतारमण को रफ़ाल डील से जुड़े कुछ सवालों के जवाब देने की खुली चुनौती दी.
उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री तो चले गए हैं. मेरे सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया है. अब रक्षा मंत्री लोकसभा में इस बारे में बात कर सकती हैं. मैं उनसे रफ़ाल डील पर ये सवाल पूछना चाहता हूं."
- नए रफ़ाल सौदे में विमान की कीमत बढ़ाने का फ़ैसला किसने किया?
- वायुसेना को जब 126 विमानों की ज़रूरत थी तो विमानों की संख्या में कमी क्यों लाई गई?
- अनिल अंबानी को कॉन्ट्रैक्ट देने का फ़ैसला किसने किया?
- एचएएल को इस डील से किसने बाहर किया?
- क्या रक्षा मंत्रालय ने नए सौदे को लेकर कोई आपत्ति दर्ज की? इन आपत्तियों से संबंधित दस्तावेज़ हैं क्या?
'कांग्रेस क्यों नहीं लाई लड़ाकू विमान'
निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी के सवालों के जवाब देते हुए कहा, "यूपीए ने रफ़ाल डील को रोक दिया. इस बात की चिंता नहीं की कि वायु सेना बहुत मुश्किल में थी. आपने ये डील पूरी नहीं की क्योंकि ये आपके मुताबिक़ नहीं थी. क्योंकि इस डील से आपको कुछ पैसा नहीं मिला."
"वे तब तक विमान नहीं खरीदना चाहते थे जब तक कि कुछ और नहीं हो जाता. रक्षा सौदों और रक्षा से जुड़े मामलों का सौदा करने में अंतर होता है, हम राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रक्षा सौदे करते हैं, रक्षा से जुड़े विषयों का सौदा नहीं करते हैं."
"आप ये कहकर देश को भ्रमित कर रहे हैं कि एनडीए सरकार ने रफ़ाल विमानों की संख्या 126 से घटाकर 36 कर दी. कांग्रेस सरकार सिर्फ़ 18 तैयार विमान खरीदने वाली थी जबकि एनडीए ने ये संख्या बढ़ाकर 36 की. देश को पहला रफ़ाल विमान 2019 के सितंबर महीने में और सभी विमान 2022 तक मिल जाएंगे."
'एचएएल पर घड़ियाली आंसू'
निर्मला सीतारमण ने एचएएल के मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि उनकी सरकार ने एचएएल को वायु सेना के लिए क़रीब एक लाख करोड़ रुपये के विमान बनाने का ठेका दिया है.
उन्होंने कहा, "कांग्रेस हमारे ऊपर एचएएल को दरकिनार करने का आरोप लगाती है. लेकिन जब कांग्रेस सत्ता में थी तो उन्होंने दस साल के समय में एचएएल के लिए कुछ क्यों नहीं किया. कांग्रेस पार्टी एचएएल के नाम पर घड़ियाली आंसू बहाना बंद करे."
निर्मला सीतारमण ने अपने भाषण में अगस्ता वेस्टलैंड के मुद्दे को शामिल करते हुए कहा, "हेलिकॉप्टर को एचएएल भी बना सकता था लेकिन यूपीए सरकार ने एचएएल से हेलिकॉप्टर नहीं बनवाया क्योंकि एचएएल से इन्हें सिर्फ़ हेलिकॉप्टर मिलता और कुछ नहीं."
सुप्रीम कोर्ट ने दी क्लीन चिट
रक्षा मंत्री सीतारमण ने सुप्रीम कोर्ट को दिग्भ्रमित करने के आरोप पर बोलते हुए कहा कि कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करने के बाद कहा है कि 36 विमानों की खरीद में उसे कोई भी ऐसी बात नहीं दिखी है जिसकी वजह से हस्तक्षेप किया जाए और कुछ लोगों की धारणा किसी जांच का आधार नहीं हो सकती है.
राहुल गांधी ने फिर बोला हमला
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने निर्मला सीतारमण के भाषण के बाद उनसे नए सवाल पूछे.
राहुल गांधी ने कहा कि रक्षा मंत्री सीतारमण ने अपने ढाई घंटे के भाषण में एक बार भी अनिल अंबानी का नाम नहीं लिया और ये नहीं बताया कि आख़िर ये ठेका अनिल अंबानी की कंपनी को कैसे मिला.
राहुल ने कहा, "मैं रक्षा मंत्री सीतारमण और पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर पर आरोप नहीं लगा रहा हूं. मैं ये बात साफ़ करना चाह रहा हूं कि आप लोगों ने एक झूठ को छिपाने के अलावा कुछ नहीं किया है. लेकिन मैं साफ बताना चाहता हूं कि नरेंद्र मोदी इस स्कैम में सीधे-सीधे शामिल हैं."
राहुल ने सीतारमण को फिर घेरते हुए कहा, "अनिल अंबानी को इस कॉन्ट्रैक्ट में लाने का फ़ैसला किसने किया. इसके साथ ही आपने ये जवाब नहीं दिया कि विमान के दाम कैसे बढ़े. और अगर पड़ोस इतना ख़तरनाक हो गया है तो आपने विमानों की संख्या को 126 से 36 क्यों कर दी? अगर आपको विमान सही दाम पर मिल रहे थे तो 126 क्यों नहीं खरीदे?"
सीतारमण ने दिया राहुल को जवाब
यूपीए की सरकार फ्रांस से तैयार 18 रफ़ाल विमान ख़रीदना चाहती थी. वो (यूपीए) भी पूरे के पूरे 126 विमान एचएएल में तैयार नहीं करवा रही थी. बाकी (126 माइनस 18) विमान एचएएल में तैयार होने थे, लेकिन इस संबंध में कोई एग्रीमेंट नहीं हो सका.
हमारे मामले में हमने नया रणनीतिक एग्रीमेंट किया और कहा कि जो भी बिडर हो वो ये विमान भारत में तैयार करेगा, फिर चाहे वो एचएएल हो या डीआरडीओ या फिर कोई और.
ऑफसेट पार्टनर के बारे में बताऊं तो इसके लिए 2013 की रक्षा ख़रीद नीति का पालन किया गया है और ये नीति हमें यूपीए सरकार से बनी-बनाई मिली थी. इस ऑफसेट गाइडलाइंस के तहत दो ऑफसेट कंपनियों के साथ 23 सितंबर 2016 को समझौता हुआ, पहला दसौ एविएशन के साथ और दूसरा एमडीबीए (मुकेश धीरूभाई अंबानी) के साथ. क्योंकि हमारा समझौता सीधे फ्रांस सरकार के साथ था, इसलिए मुख्य बिडर किसको ऑफसेट पार्टनर बनाता है इसमें हमारी कोई भूमिका नहीं थी.
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