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अमेरिका-इसराइल हमले में ईरान का शीर्ष नेतृत्व मारा गया, अब ट्रंप बात किससे करेंगे?
- Author, कैने पीरी
- पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
- Author, कोट बोवी
- पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
- Author, बीबीसी न्यूज़ पर्शियन
- पढ़ने का समय: 14 मिनट
इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल कात्ज़ कह चुके हैं कि इसराइली सेना को किसी भी वरिष्ठ ईरानी अधिकारी को निशाना बनाने के लिए अधिकृत कर दिया गया है और इसके लिए उसे किसी अतिरिक्त मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं है.
यह बयान ऐसे समय आया जब कुछ ही दिनों पहले इसराइल डिफ़ेंस फ़ोर्सेज़ यानी आईडीएफ़ ने ईरान के दो शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों अली लारिजानी और खुफ़िया मंत्री इस्माइल ख़ातिब को मार डाला. आईडीएफ़ ने हाल के हफ़्तों में ईरान के कई शीर्ष नेताओं और अधिकारियों को मारा है.
कात्ज़ ने कहा, "प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू और मैंने आईडीएफ़ को अधिकृत किया है कि वह किसी भी वरिष्ठ ईरानी अधिकारी को ख़त्म कर सकता है, जिनके ख़िलाफ़ ख़ुफ़िया और ऑपरेशनल प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, और इसके लिए अतिरिक्त मंजूरी की भी ज़रूरत नहीं है."
लेकिन ईरान के पावर स्ट्रक्चर में ये अधिकारी कितने महत्वपूर्ण थे और अब सत्ता पर वास्तव में किसका नियंत्रण है?
आइए नज़र डालते हैं ईरान के पहले और मौजूदा नेतृत्व पर.
आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई- सुप्रीम नेता (मृत)
ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या कई लोगों के लिए चौंकाने वाली थी, ख़ासकर इसलिए क्योंकि यह 28 फ़रवरी को हुई, जो ईरान पर अमेरिका-इसराइल हमलों का पहला ही दिन था.
86 वर्षीय नेता ने तीन दशकों से अधिक समय तक शासन किया था. उन्होंने आयतुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी की जगह ली थी, जिन्होंने 1979 में ईरान के इस्लामी गणराज्य की स्थापना की थी.
ख़ामेनेई बेहद ताक़तवर पद पर थे. वे राष्ट्राध्यक्ष और सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ़ थे, जिनमें विशिष्ट रिवोल्यूशनरी गार्ड्स भी शामिल हैं.
पूरी तरह तानाशाह नहीं होते हुए भी, वे सार्वजनिक नीति के किसी भी मामले को वीटो कर सकते थे. वे सार्वजनिक पदों के लिए उम्मीदवारों का चयन खुद कर सकते थे.
आयतुल्लाह ने अपने आस पास विभिन्न शक्ति केंद्रों का जटिल नेटवर्क बना रखा था.
साथ ही, कई बार वे ईरान के सुधारवादियों और कट्टरपंथियों के बीच होने वाली खींचतान को दूर से देखते हुए खुद को राजनीति से लगभग अलग दिखाते थे.
लेकिन ख़ामेनेई शायद ही कभी असहमति को बहुत ज़्यादा बढ़ने देते थे. वह उन नीतियों को भी आगे नहीं बढ़ने देते थे जिनसे वे असहमत होते थे.
मोजतबा ख़ामेनेई- मौजूदा सुप्रीम नेता (जीवित)
मोजतबा ख़ामेनेई को 8 मार्च 2026 को अपने पिता के उत्तराधिकारी के रूप में नामित किया गया था, हालांकि वो सार्वजनिक रूप से नहीं देखे गए हैं, न ही उसके बाद से उनका कोई वीडियो या तस्वीर सामने आई है.
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने दावा किया था कि नए सर्वोच्च नेता 'घायल और शायद पंगु' हो गए थे, हालांकि उन्होंने अपने इस दावे के पक्ष में कोई सबूत नहीं दिए थे. 28 फ़रवरी को तेहरान पर हुए हमलों में मोजतबा के माता-पिता और भाई की मौत हो गई थी.
12 मार्च को सर्वोच्च नेता के रूप में उनके पहले संबोधन को सरकारी टीवी पर उनके बयान के रूप में पढ़ा गया.
बयान में मोजतबा ख़ामेनेई ने होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद करने की क़सम खाई और कहा कि किसी भी विदेशी जहाज़ को यहां से गुज़रने नहीं दिया जाएगा.
होर्मुज़ स्ट्रेट बंद होने से दुनिया के तक़रीबन 20 फ़ीसदी तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार युद्ध में मारे गए नागरिकों के 'खून का बदला लेने से पीछे नहीं हटेगी.'
20 मार्च को, सरकारी टीवी पर फारसी नववर्ष नवरोज़ के लिए उनका एक और लिखित संदेश पढ़ा गया. यह उनके पिता के नवरोज़ संदेशों से बिल्कुल अलग था, जो परंपरागत रूप से कैमरे के सामने आकर संदेश देते थे.
अली लारिजानी- सुप्रीम नेशनल सिक्युरिटी काउंसिल सेक्रेटरी (मृत)
68 साल के अली लारिजानी 17 मार्च 2026 को तेहरान के पारदिस इलाके में अमेरिका-इसराइल के हमले में मारे गए थे. इस हमले में अपने बेटे और उनके एक अधिकारी की मौत हो गई थी. ख़ामेनेई के बाद लारिजानी हमलों में मारे गए सबसे वरिष्ठ ईरानी अधिकारी थे.
पूर्व रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कमांडर रहे लारिजानी ने इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान ब्रॉडकास्टिंग के प्रमुख के रूप में अपनी पहचान बनाई. उन्होंने ये पद एक दशक तक संभाला, इसके बाद 2004 में वे ख़ामेनेई के सुरक्षा सलाहकार बने.
लारिजानी ने 2005-07 के दौरान पश्चिम देशों के साथ ईरान के मुख्य परमाणु वार्ताकार के रूप में काम किया, लेकिन तत्कालीन राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के साथ मतभेदों के बाद उन्हें इस पद से हटा दिया गया था. वे 12 सालों तक ईरानी संसद के स्पीकर रहे, जो इस पद पर किसी भी व्यक्ति का सबसे लंबा कार्यकाल है.
लारिजानी ने सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में ख़ामेनेई का प्रतिनिधित्व भी किया और माना जाता है कि दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में ईरान भर में हुए विरोध प्रदर्शनों पर सुरक्षा बलों, जिनमें बसीज अर्धसैनिक बल भी शामिल थे, द्वारा किए गए अभूतपूर्व दमन उनकी ही देखरेख में हुए थे. मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, इस दौरान कम से कम 6,508 प्रदर्शनकारी मारे गए और 53,000 गिरफ़्तार किए गए.
रियर एडमिरल अली शमख़ानी- ईरानी रक्षा परिषद के सचिव (मृत)
अली शमख़ानी, ख़ामेनेई के क़रीबी सलाहकार थे और ईरान की सुरक्षा और परमाणु नीति निर्धारण में एक अहम भूमिका निभाते थे. वह ईरान के एकमात्र रियर एडमिरल थे. 28 फ़रवरी को तेहरान पर हुए हमलों में उनकी मौत हो गई.
वे जून 2025 में इसराइल और ईरान के बीच हुए 12-दिवसीय युद्ध के दौरान अपने घर पर हुए एक हमले में बाल-बाल बच गए थे.
1980 के दशक में हुए ईरान-इराक़ युद्ध के दौरान शमख़ानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के सबसे महत्वपूर्ण कमांडरों में से एक थे.
पिछले चार दशकों में उन्होंने कई अहम पद संभाले- जिनमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के मंत्री, रक्षा मंत्री, नौसेना के कमांडर और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव जैसे पद शामिल हैं. और हाल के सालों में उन्होंने सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों के दमन में भी अहम भूमिका निभाई थी.
मेजर जनरल मोहम्मद पाकपोर- आईआरजीसी के कमांडर-इन-चीफ़ (मृत)
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, मेजर जनरल मोहम्मद पाकपौर भी 28 फ़रवरी को तेहरान पर हुए हमलों में मारे गए थे.
आईआरजीसी की ग्राउंड फ़ोर्स के कमांडर के रूप में 16 साल तक सेवा देने वाले पाकपोर को उनके पूर्ववर्ती हुसैन सलामी की 12-दिवसीय युद्ध में मौत के बाद कमांडर-इन-चीफ़ बनाया गया था.
मसूद पेज़ेश्कियान- राष्ट्रपति (जीवित)
सुधारवादी छवि वाले मसूद पेज़ेश्कियान 6 जुलाई 2024 को ईरान के राष्ट्रपति चुने गए थे. उन्होंने 12 धर्मगुरुओं और न्यायविदों वाली गार्जियन काउंसिल द्वारा संचालित जांच प्रक्रिया को पास किया था.
71 वर्षीय पूर्व हार्ट सर्जन और ईरानी संसद के सदस्य पेज़ेश्कियान, ईरान की कुख्यात मॉरैलिटी पुलिस के आलोचक रहे हैं और उन्होंने 'एकता और सामंजस्य' और दुनिया से ईरान के 'अलगाव' को ख़त्म करने का वादा करके हलचल मचा दी थी.
11 मार्च 2026 को, पेज़ेश्कियान ने एक्स पर पोस्ट करते हुए क्षेत्र में 'शांति के प्रति ईरान की प्रतिबद्धता' को दोहराया.
पांच दिन बाद, उन्होंने अमेरिका और इसराइल के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय समर्थन की अपील की. उन्होंने कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि वैश्विक समुदाय इस हमले की निंदा करेगा और हमलावरों को अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का सम्मान करने के लिए मजबूर करेगा."
मोहम्मद बाग़र ग़लीबाफ़- ईरानी संसद के स्पीकर (जीवित)
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बग़र ग़लीबाफ़ ने भले ही अपनी रिवोल्यूशनरी गार्ड की वर्दी छोड़कर सिविल ड्रेस पहन ली हो, लेकिन उनमें सत्तावादी रुझान अब भी बना हुआ है और वे शासन के समर्थन में खुलकर बोलते रहे हैं.
एक प्रशिक्षित पायलट ग़लीबाफ़ अत्यधिक महत्वाकांक्षी माने जाते हैं और चार बार ईरान के राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ चुके हैं.
64 वर्षीय ग़लीबाफ़ अब युद्ध प्रयासों का नेतृत्व करने में एक अहम भूमिका निभाते हुए नज़र आ रहे हैं.
ईरान के एनर्जी इन्फ़्रास्ट्रक्चर पर हमलों के बाद, उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, "आंख के बदले आंख का हिसाब लागू है और टकराव का एक नया चरण शुरू हो गया है."
मंगलवार, 24 मार्च 2026 को, अमेरिका के साथ बातचीत की ख़बरों पर प्रतिक्रिया देते हुए, ग़लीबाफ़ ने एक्स पर लिखा, "अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है और फ़र्ज़ी ख़बरों का इस्तेमाल वित्तीय और तेल बाज़ारों को प्रभावित करने और उस दलदल से निकलने के लिए किया जा रहा है, जिसमें अमेरिका और इसराइल फंसे हुए हैं."
उन्होंने लिखा, "ईरानी लोग हमलावरों को पूरी और ऐसी सज़ा देने की मांग करते हैं, जिसका उन्हें पछतावा हो. जब तक यह लक्ष्य हासिल नहीं हो जाता तब तक सभी ईरानी अधिकारी अपने सर्वोच्च नेता और जनता के साथ मजबूती से खड़े हैं."
ब्रिगेडियर जनरल ग़ुलामरेज़ा सुलेमानी- बसीज कमांडर (मृत)
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, बसीज कमांडर ब्रिगेडियर जनरल ग़ुलामरेज़ा सुलेमानी 17 मार्च 2026 को अमेरिका-इसराइल के हमलों में मारे गए.
ब्रिगेडियर जनरल अहमद रेज़ा रदान- पुलिस प्रमुख (जीवित)
पुलिस प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल अहमद रेज़ा रदान सख़्त सोशल कोड्स को लागू करने और असहमति को दबाने के लिए ज़िम्मेदार माने जाते हैं.
2023 में, उन्होंने नूर योजना की घोषणा की, जिसमें निगरानी कैमरों और स्मार्ट तकनीक का इस्तेमाल कर हिजाब क़ानून तोड़ने वाली महिलाओं की पहचान कर उन्हें दंडित किया जाता है. इस क़ानून के तहत गाड़ियों को ज़ब्त करना और व्यवसायों को बंद करना भी शामिल है.
हाल ही में, रदान ने सत्ता-विरोधी प्रदर्शनों के ख़िलाफ़ कड़ा रुख़ अपनाया है और युद्ध की शुरुआत में अपने बलों को कहा था कि वे सड़कों पर उतरने वाले किसी भी व्यक्ति को "दुश्मन" की तरह मानें, अगर वह व्यक्ति "दुश्मन के कहने पर" ऐसा (प्रदर्शन) करता है.
ग़ुलामहुसैन मोहसेनी इजेई- ईरान के मुख्य न्यायाधीश (जीवित)
इसी साल जनवरी में, कड़े रुख़ वाले मुख्य न्यायाधीश ग़ुलामहुसैन मोहसनी इजेई ने चेतावनी दी थी कि युद्ध से पहले हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसक कृत्यों में दोषी पाए गए लोगों के ख़िलाफ़ "कोई नरमी नहीं" बरती जाएगी.
एस्कंदर मोमेनी- गृह मंत्री (जीवित)
अगस्त 2024 से गृह मंत्री रहे ब्रिगेडियर जनरल एस्कंदर मोमेनी की जड़ें आईआरजीसी और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान की पुलिस कमान में गहरी रही हैं.
इस्माइल क़ानी- आईआरजीसी कुद्स फ़ोर्स कमांडर (जीवित)
ईरानी मीडिया में "लेवांत के जनरल" के नाम से जाने जाने वाले ब्रिगेडियर जनरल इस्माइल क़ानी 2020 में आईआरजीसी की कुद्स फोर्स के कमांडर बने.
2012 में, अमेरिकी ट्रेज़री विभाग ने उन पर मध्य पूर्व और अफ़्रीका, ख़ासकर गाम्बिया में कुद्स फोर्स के तत्वों को वित्तीय मदद और हथियारों की सप्लाई की निगरानी करने के आरोप में प्रतिबंध लगाए थे.
इस्माइल ख़ातिब- ख़ुफ़िया मामलों के मंत्री (मृत)
इस्माइल ख़ातिब को 2021 में दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने ईरान के रक्षा मंत्री के रूप में नियुक्त किया था.
उन्होंने अली ख़ामेनेई सहित कई वरिष्ठ धर्मगुरुओं की निगरानी में इस्लामी न्यायशास्त्र की पढ़ाई की थी और ख़ुफ़िया मंत्रालय और ईरान के सर्वोच्च नेता के कार्यालय में कई वरिष्ठ पदों पर कार्य किया था.
18 मार्च 2026 को, मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा था कि इसराइली हवाई हमले में ख़ातिब की 'कायरतापूर्ण हत्या' ने ईरान को 'गहरे शोक' में डाल दिया है.
मेजर जनरल अब्दुलरहीम मुसावी- ईरानी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ़ के प्रमुख (मृत)
28 फ़रवरी को तेहरान पर हुए हमलों में मारे गए, ईरानी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ़ के प्रमुख मेजर जनरल अब्दुलरहीम मुसावी ने पिछले साल 12 जून को 12-दिवसीय युद्ध में मारे गए मेजर जनरल मोहम्मद बाग़ेरी की जगह ली थी.
सादिक़ लारिजानी- एक्सपीडियेंसी काउंसिल के चेयरमैन (जीवित)
अली लारिजानी के भाई सादिक़ लारिजानी एक्सपीडियेंसी काउंसिल के प्रमुख हैं, जो संसद और संवैधानिक निगरानी संस्था गार्जियन काउंसिल के बीच अंतिम निर्णय लेने वाली संस्था है.
अब्बास अराग़ची- विदेश मंत्री (जीवित)
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची और मध्य पूर्व के लिए अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ के बीच बातचीत की ख़बरें हैं, लेकिन इन वार्ताओं को बहुत शुरुआती बताया जा रहा है.
15 मार्च 2026 को, विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने बीबीसी के सहयोगी चैनल सीबीएस न्यूज़ से कहा था कि ईरान ने इसराइल और अमेरिका के साथ युद्ध में 'कभी युद्धविराम नहीं मांगा.'
उन्होंने कहा, "यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका द्वारा चुना गया युद्ध है और हम अपनी आत्मरक्षा जारी रखेंगे."
ब्रिगेडियर जनरल अज़ीज़ नासिरज़ादेह- रक्षा मंत्री (मृत)
रक्षा मंत्री ब्रिगेडियर जनरल अज़ीज़ नासिरज़ादेह भी 28 फ़रवरी को तेहरान पर हुए हमलों में मारे गए.
ईरान के नेताओं को निशाना बनाने से क्या हासिल हुआ?
अमेरिका-इसराइल की योजना ईरानी शासन को "हक्का-बक्का और भ्रमित" करने की थी, ऐसा युद्ध के कुछ ही दिनों बाद अमेरिकी ज्वाइंट चीफ्स ऑफ़ स्टाफ़ के अध्यक्ष डेन केन ने कहा.
जंग की शुरुआत में, ईरान में सत्ता परिवर्तन अमेरिका और इसराइल दोनों के नेताओं का घोषित लक्ष्य था. अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानियों से "अपनी सरकार संभालने" का आह्वान किया, जिसे इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने भी दोहराया. 19 मार्च को उन्होंने ईरानी लोगों से "इस मौके पर उठ खड़े होने" को कहा था.
लेकिन एक ऐसी संस्कृति में जहां शहादत का धार्मिक और राजनीतिक महत्व बहुत बड़ा है, इन वरिष्ठ नेताओं की मौत को पतन के बजाय लगातार बढ़ते रहने की कहानी के रूप में पेश किया जा रहा है.
मसलन सरकारी टीवी पर एक भावुक प्रस्तोता ने अली ख़ामेनेई की मौत की घोषणा करते हुए कहा कि वो "शहादत का मीठा, पवित्र घूंट पी गए."
और दो हफ्ते से अधिक समय बाद, अली लारिजानी की मौत की रिपोर्ट करते हुए सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने कहा, "शहीदों की पवित्र आत्माओं ने ईश्वर के धर्मनिष्ठ सेवक, शहीद डॉ. अली लारिजानी की पवित्र आत्मा को खुद में समाहित कर लिया. ईरान और इस्लामी क्रांति की उन्नति के लिए जीवनभर संघर्ष के बाद, उन्होंने अंततः अपनी लंबे समय से चली आ रही आकांक्षा को पूरा किया, ईश्वर की पुकार का जवाब दिया और सेवा के मोर्चे पर शहादत की मधुर अनुभूति को सम्मानपूर्वक हासिल किया."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.